Saturday, 15 July 2017

भारत रक्षा मंच के मुरली मनोहर शर्माजी द्वारा व्यक्त बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या की वास्तविक भीषणता !


१४ जून को अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के सायंकाल के सत्र में मान्यवरोंद्वारा व्यक्त किए गए विचार

षष्ठ अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन में भारत रक्षा मंच (ओडिशा) के राष्ट्रीय सह-संयोजक मुरली मनोहर शर्मा ने उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को उद्बोधित करते हुए कहा कि, आनेवाले समय में देश का प्रधानमंत्री कौन होगा, यह बांग्लादेशी घुसपैठिए निश्‍चित करेंगे !
१. देश में सर्वाधिक घुसपैठिए बांग्लादेशी हैं । उनके लिए नौकरी, पैन कार्ड, मतदान परिचय पत्र आदि अनेक सुविधाएं बनाकर देने में दलाल तत्काल तैयार रहते हैं । शासन की सर्व प्रकार की योजनाएं और सुविधाएं उनके लिए लागू की जाती हैं । इस प्रकार घुसपैठ करनेवाले केवल देश लूटने के लिए ही आए होते हैं ।
२. इसके विपरीत बांग्लादेशी हिन्दू देश में आश्रय के लिए आते समय वैध मार्ग से आता है; परंतु उसकी प्रविष्टी बांग्लादेश से आया हुआ की जाती है । इसलिए उसे देश की नागरिकता शीघ्र नहीं मिलती ।
३. अन्य देशों की तुलना में अपने देश में शरणार्थियों को सर्वाधिक सुविधाएं दी जाती हैं ।
४. आनेवाले काल में देश का प्रधानमंत्री कौन होगा, यह निर्णय बांग्लादेशी घुसपैठिए करेंगे, ऐसी भयावह स्थिति उत्पन्न होगी ।
५. देश में कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, इसकी संख्या शासन भी नहीं दे सकता ।  ऐसे घुसपैठिए देशभर में फैले हुए हैं तथा उन्हें देश से भगाना सरल नहीं है । ६. यह समस्या बढ रही है तथा वह गंभीर है । कल वे अपना एक अलग देश मांग सकते हैं ।

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के संबंध में श्री. मुरली मनोहर शर्माजी के  गौरवोद्गार

हिन्दू अधिवेशन का रूपांतरण वटवृक्ष में हो रहा है ! अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन जब पहली बार आयोजित किया था, उस समय  ५ से अधिक राज्यों के हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन सम्मिलित हुए थे । आज का अधिवेशन  देश-विदेश के १३२ से अधिक संगठनों ने एकत्रित आकर आयोजित किया है । इसके द्वारा अधिवेशन का रूपांतरण अब वटवृक्ष में हो रहा है । सनातन संस्था और हिन्दू  जनजागृति समिति सभी को एकत्रित कर हिन्दू राष्ट्र की दिशा में मार्गक्रमण कर रही है । अधिवेशन में आए हुए प्रत्येक को हिन्दू राष्ट्र लाने और उसका प्रसार करने का दायित्व निभाना पडेगा । प्रत्येक को हिन्दू ध्वज सात समुद्र पार जाकर फहराना है ।

उद्बोधन सत्र में पारित प्रस्ताव


केंद्रशासन देश में अवैध रूप से वास्तव्य करनेवाले बांग्लादेशी घुसपैठियों को उनके देश में लौटाने का कानून तत्काल बनाए ।
बांग्लादेश से प्रतिदिन भारत में आनेवाले बांग्लादेशी नागरिकों के लिए काम करने की अनुमति (वर्क परमिट) देनेवाला कानून संसद में पारित हो ।
दंगों के पश्‍चात पीडितों को हानिभरपाई देने के लिए नियुक्त की गई पूछताछ समिति में हिन्दुत्वनिष्ठों को भी सम्मिलित किया जाए ।
गत ५ वर्षों में हिन्दुआें के विरोध में हुए दंगों में पीडितों का पुनर्वसन, उन्हें दी जानेवाली सहायता राशि की योग्यता-अयोग्यता और उस पर हुई प्रत्यक्ष कार्यवाही की पूछताछ के लिए एक समिति नियुक्त की जाए । उस समिति की सिफारिशों के अनुसार दंगे पीडितों को सहायता राशि दी जाए ।
दंगों में जिन हिन्दुआें के घर नष्ट हो गए हों, उनका पुनर्वसन किया जाए ।
स्वतंत्रता के पश्‍चात आज तक हुए दंगों में मृत हुए मुसलमानों के लिए उनके परिजनों को दी गई सहायता राशि में जो सर्वाधिक सहायता राशि हो, उतनी ही राशि मृत हिन्दू के परिजनों को दी जाए ।  उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों ने ये सभी प्रस्ताव ‘जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम ।’ के  जयघोष में हाथ उठाकर पारित किए ।

Wednesday, 28 June 2017

मुंबई : पिछले ३० वर्षों से अवैध तरीके रहनेवाले ३ बांग्लादेशी गिरफ्तार


मुंबई : शिवाजी नगर पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीसी) द्वारा गोवंडी के रफीक नगर से एक महिला समेत तीन बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी कीया गया है। सभी आरोपी गैरकानूनी तरीके से पिछले ३० वर्षों से मुंबई में रह रहे थे। पुलिस की गिरफ्त में आए इन बांग्लादेशी नागरिकों का नाम जाकिर सगीर हुसैन (५२), सुल्ताना जाकिर हुसैन (३८) और खुशाब जाकिर हुसैन (२१) हैं, जो गोवंडी में दर्जी का काम करते हैं।
पुलिस ने आईपीसी की धारा ४२०, ४६५, ४६७, ४६८, ४७ और ३१ के अलावा पासपोर्ट ऐक्ट के तहत मामला दर्ज कर इन्हें स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि, गोवंडी, शिवाजी नगर, मानखुर्द और चेंबूर बांग्लादेशियों के लिए सबसे आसान जगह बन गई है। यह कार्रवाई २३ जून को की गई थी।

फर्जी दस्तावेज बरामद

शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारी नारायण तुरकुंडे के अनुसार, तीनों आरोपी गोवंडी के शिवाजी नगर स्थित रफीक नगर में रहते थे। पेशे से दर्जी का काम करते हैं। गुप्त सूचना के आधार पर जब कार्रवाई की गई, तो पाया गया कि, तीनों आरोपियों के जन्म प्रमाणपत्र फर्जी हैं।
ये लोग ऐसे ही फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नकली मतदान कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड एवं अन्य दस्तावेज बना कर भारत में गैरकानूनी तरीके से रहने लगते हैं। पुलिस ने सोशल सर्विस ब्रांच की मदद से कार्रवाई को अंजाम दिया है। गोवंडी, शिवाजी नगर, मानखुर्द जैसे क्षेत्र में पुलिस अक्सर कॉम्बिंग ऑपरेशन चला कर गैरकानूनी तरीके से रहने वालों को गिरफ्तार करती रहती है।

पहले भी पकडे गए हैं बांग्लादेशी

स्थानीय सूत्र बताते हैं, ‘गोवंडी, शिवाजी नगर और मानखुर्द पुलिस की हद में अभी भी सैकडों बांग्लादेशी गैरकानूनी तरीके से रह रहे हैं। जब इनकी जांच की जाती है तो ये लोग भारतीय कागजात दिखाकर पुलिस से बच निकलते हैं। हालांकि, पुलिस अब इन बांग्लादेशियों के विरुध्द सख्त कार्रवाई करने के तयारी में हैं। इनके दस्तावेजों की भी बारीक जांच-पडताल की जा रही है।
शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन के एटीसी अधिकारी सतीशचंद्र राठौड के अनुसार, पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के दस्तावेज की जांच रही है। हमारे पुलिस हवलदार नवनाथ लोंडे, नलावडे और झेरडे ने इससे पहले भी पांच ऐसे आरोपियों को सोशल ब्रांच की मदद से गिरफ्तार किया था, जो गैरकानूनी तरीके से गोवंडी में छुपे हुए थे।
स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

Saturday, 25 March 2017

बांग्लादेश से भागकर बंगाल, असम व त्रिपुरा में शरण ले रहे आतंकी : रिपोर्ट


कोलकाता : बांग्लादेश सरकार की एक रिपोर्ट पश्चिम बंगाल सरकार और भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है। बांग्लादेश सरकार द्वारा भारतीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि बंगाल, असम और त्रिपुरा में आतंकी नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।
बांग्लादेश में सक्रिय कई आतंकी संगठनों को इन राज्यों में पनाह मिल रही है। बांग्लादेश और भारत की सीमा के आर-पार जाना आसान है। आतंकी इसी का फायदा उठाकर बंगाल में घुसपैठ कर रहे हैं। बंगाल की लगभग २२००० किलोमीटर की सीमा बांग्लादेश से लगी है। हरकत-उल-जिहादी अल-इस्लामी और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश सीमा पर कमजोर सुरक्षा का फायदा उठा रहे हैं। बंगाल की सीमा से भारत में घुसपैठ करने वाले कई आतंकियों के अलकायदा व इस्लामिक स्टेट से भी संबंध बताए जाते हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में वर्ष २०१६ में जमात-उल-मुजाहिदीन और हरकत-उल-जिहादी अल इस्लामी यानी हूजी के कई आतंकियों ने घुसपैठ की है। खुफिया रिपोर्ट बताती हैं कि, इन दोनों संगठनों के दो हजार से ज्यादा आतंकियों ने भारत में घुसपैठ की। इनमें से ७२० पश्चिम बंगाल के रास्ते से पहुंचे हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल के अधिकारी इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हैं।
इन आंकड़ों पर विश्वास न भी करें तो भी जिस तरह से बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है, वह बेहद खतरनाक है।
पिछले वर्ष जुलाई में ढाका के गुलशन कैफे में हुए धमाके का एक मास्टरमाइंड बंगाल के एक होटल में ठहरा था। इस आतंकी हमले के तार सीधे आईएस (इस्लामिक स्टेट) से जुड़े थे। आतंकी हमला बांग्लादेशी मूल के कनाडाई नागरिक तमीम चौधरी ने कराया था। बाद में वह खुद भी बांग्लादेश पुलिस को हाथों मारा गया था।
माना जाता है कि, तमीम और जेएमबी (जमात–उल मुजाहिदीन बांग्लादेश) का आतंकी मोहम्मद सुलेमान, ढाका हमले से पहले भारत आए थे। यहां वे मालदा जिले में भारत के अबू मूसा से मिले थे। सुलेमान और उसके साथ आया तमीमी, बंगाल के एक होटल में ठहरे थे। बंगाल मे इस आतंकी नेटवर्क का एक और सबूत उस समय मिला जब कोलकाता पुलिस ने ढाका के गुलशन कैफे में हुए हमले के एक आरोपी इदरिस अली को गिरफ्तार किया।
इदरिस अली को कोलकाता के बड़ा बाजार क्षेत्र से पकड़ा गया था। कोलकाता पुलिस को इदरिस के बड़ा बाजार में होने की जानकारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिली थी। बंगाल में अवैध घुसपैठियों की दिक्कत राजनैतिक भी है और सुरक्षा का मामला भी।
स्त्रोत : जागरण

Sunday, 7 August 2016

बांग्लादेशी गाय तस्कर सीमा क्षेत्र में जुए के अड्डों में लूट रहे है पैसे !


  • दिन भर जुए के अड्डों में मौज मस्ती व खाना पीना आैर रात को गायों को लेकर जा रहे है बांग्लादेशी
  • सीमावर्ती हबीबपुर थाना क्षेत्र के आग्रा हरिश्चंद्रपुर, तालतली, पान्नापुर, सहित कई गांवों में चल रहा है अड्डा
  • स्थानीय पान की दुकान में बांग्लादेशी व भारतीय रुपयों का चल रहा लेन देन
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मालदा : मालदा के भारत बांग्लादेश सीमावर्ती हबीबपुर व बामनगोला थाना क्षेत्र में खुलेआम जुए का अड्डा चल रहा है। सीमा पार कर बांग्लादेशी जुआरी जुआ खेलने के लिए यहां आ रहे हैं। जिसमें लाखों रुपये का खेल चल रहा है। जिला प्रशासन को दी गई एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर जिला पुलिस सतर्क हुर्इ है।
बुधवार रात को सीमावर्ती बामनगोला, हबीबपुर सहित जिले के विभिन्न थाना क्षेत्र में जिला पुलिस ने अभियान चलाकर सात जुआरीयों को गिरफ्तार किया। इनके पास से मोटी रकम बरामद हुई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पिछले १८ जुलाई को मालदा के भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती बामनगोला क्षेत्र के निवासी नीरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने बामनगोला प्रखंड के बीडीओ कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज की। जिसमें उन्होंने बताया कि उनके घर के पास पिछले कई महीनों से जुए के कई अड्डे चल रहे हैं। क्षेत्र के गाय तस्कर ये जुए के अड्डे चला रहे हैं। जिसमें सीमा पार कर बांग्लादेशी जुआरी पहुंच रहे हैं। यह शिकायत मिलने के बाद ही प्रखंड प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी व जिला पुलिस प्रशासन को भेजी गई। इसके बाद ही प्रशासन हरकत में आई।
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पुलिस ने जांच शुरू की। इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। पुलिस को पता चला कि भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती हबीबपुर थाना क्षेत्र के आग्रा हरिश्चंद्रपुर, तालतली, पान्नापुर, केदारीपाड़ा, टिकियापाड़ा, बामनगोला थाने के खुटादह, बटली सहित विभिन्न गांवों में ये जुए के अड्डे लग रहे हैं। खासकर भारतीय गाे-तस्कर यहां जुए के अड्डे लगा रहे हैं। जिसमें सीमा पार कर बांग्लादेशी गाय तस्कर भाग ले रहे हैं। दिनभर जुए का अड्डा चलते रहता है। खाना पीना भी यहीं होता है। रात को ये तस्कर सीमा पार कर बांग्लादेश चले जाते हैं। इन गाय तस्करों के हाथों में रुपये रहने से इन्हें जुआ खेलने में कोई दिक्कत नहीं होती।
रात को ही बांग्लादेश से तस्करों का एक दल घुस रहा है जो दिन भर इसी तरह जुआ खेल कर दिन काट रहा है। गाय तस्करी का काम भी यही से हो रहा है। क्षेत्र के कई पान की दुकान में बांग्लादेशी व भारतीय रुपयों का लेनदेन का काम चल रहा है। यहीं से भारतीय व बांग्लादेशी रुपये तस्कर ले रहे हैं ।
मालदा के हबीबपुर थाना क्षेत्र के बेलडांगा क्षेत्र से केदारीपाड़ा क्षेत्र तक विस्तृत क्षेत्र में कंटीली तार का बाड़ नहीं लगा है। बीच से पुनर्भवा नदी बहती है । बारिश के समय में यह नदी भयंकर रूप ले लेती है। क्षेत्र की स्थिति भी खराब हो जाती है। इसका फायदा उठाकर क्षेत्र में गायों की तस्करी बढ जाती है। इतने दिनों तक बांग्लादेशी तस्करों के सीमा पार कर गायों को लेकर बांग्लादेश चले जाते थे, अब भारतीय गांव में बैठकर जुए के अड्डे में शामिल हो रहे हैं। इसे लेकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी जुआरी बांग्लादेश के नौगां व चापाइ नबाबगंज जिले के रघुरामपुर, सपाहार, कोर्सा, जबाईबिल, रोहनपुर, बदलगाछी, आक्केलपुर, बातकीपाड़ा, बामाइल व डांगापाड़ा जैसे सीमावर्ती गांवों के निवासी हैं। बिना बाड की इस सीमा ये वे बीएसएफ की आंखों में धूल झोंककर भारत में प्रवेश कर रहे हैं।
स्त्रोत : जागरण

Monday, 18 April 2016

भाजपा का मिशन असम : रोकेंगे बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ


गुवाहटी : असम में अवैध घुसपैठ को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाते हुए बीजेपी ने आज अपने दृष्टिपत्र में यह सुनिश्चित करने का वादा किया कि भारत-बांग्लादेश सीमा सील की जाएगी।
असम विधानसभा चुनाव के लिए दृष्टिपत्र जारी करते हुए बीजेपी ने मुख्यमंत्री तरुण गोगोई पर घुसपैठ को बढ़ावा देने और राज्य की जनसांख्यिकी नष्ट करने का आरोप भी लगाया। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने गोगोई सरकार पर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने घुसपैठ को बढ़ावा देकर राज्य की जनसांख्यिकी को बदलने तथा नष्ट करने की कोशिश की। कांग्रेस कई दशकों से ऐसा कर रही है और उसने कोई कार्रवाई नहीं की। असम में चार अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी का दृष्टिपत्र जेटली ने जारी किया।
दृष्टिपत्र में बीजेपी ने सत्ता में आने पर राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा को सील करने के लिए केंद्र के साथ मिलजुलकर काम करने का वादा किया है। साथ ही पार्टी ने लोगों से वादा किया कि घुसपैठियों को रोजगार देने वाले उद्योगों, कारोबारियों, छोटे और मध्यम उद्यमों तथा अन्य एजेंसियों के साथ कठोरता से निपटने के लिए एक कानून बनाया जाएगा।
राज्य के लिए फंड में केंद्र सरकार द्वारा कटौती किए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर जेटली ने कहा कि असम को उच्च कर अवमूल्यन के कारण वर्ष २०११-२०१५ की तुलना में वर्ष २०१६-२०२० के दौरान १४८ फीसदी अधिक रकम मिलेगी। जेटली ने कहा कि असम को कर अवमूल्यन के तौर पर १,४३,२३९ करोड़ रुपए मिलेंगे जैसा कि १४वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है, जबकि १३वें वित्त आयोग के दौरान राज्य को ५७,८५४ करोड़ रुपए मिले थे। उन्होंने कहा कि इसलिए लोगों को गुमराह करना बंद करें। असफल सरकार अपनी असफलता छिपाने के लिए बहाने खोज रही है।
स्त्रोत : पत्रिका

Friday, 24 October 2014

ईशान्यको घुसपैठका कर्करोग : घुसपैठियोंको मिलते हैं शासकीय लाभ


कार्तिक कृष्ण पक्ष एकादशी, कलियुग वर्ष ५११६
bangladesh-flagबांग्लादेशसे असम आनेवाले घुसपैठियोंने अलग श्रमिक संस्कृति स्थापित की है । रिक्षाचालक, घरोंका निर्माणकार्य करनेवाले मजदूर, रंगारी, माली, मार्गका निर्माणकार्य, सब्जीविक्रय आदि काम वे करते हैं । उनकी महिलाएं नौकरानीके काम करती हैं एवं कोई भी काम करनेके लिए सिद्ध रहती हैं । उसीप्रकार स्थानीय मजदूर जो काम करनेमें टोलमटोल करते हैं, वह भी ये घुसपैठिए करते हैं । काले बाजारसे नकली (प्रमाणपत्र) दस्तावेज सिद्ध कर ये घुसपैठिए भारतका नागरिकत्व प्राप्त करते हैं । ये लोग अत्यंत निर्धन होनेके कारण राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार हमी योजना एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आरोग्यसेवाके लाभ भी उन्हें मिलते हैं ।
राष्ट्रीय सुरक्षापर संकट
घुसपैठियोंकी समस्याका राष्ट्रीय सुरक्षासे भी संम्बन्ध है । असममें उपद्रव करनेवाले युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा), कामतापूर लिबरेशन आर्गनाइजेशन (केएलओ) एवं नैशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंन्ड (एनडीएफबी) आतंकवादी संगठन बांग्लादेशमें हैं । ये संगठन बांग्लादेश-म्यानमार सीमापर कॉक्सबाजारसे शस्त्रास्त्र क्रय करते हैं, यह बात भी सिद्ध हो गई है । शेख हसिनाके नेतृत्वमें बांग्लादेशमें आवामी लीगका शासन आनेके पश्चात उन्होंने भारतको सहयोग करना चालू किया एवं केएलओके मुखिया तपन पटवारीको ढाकामें अक्तूबर २००९ में नियंत्रणमें लिया । उल्फाका अध्यक्ष अरविंद राजखोवा एवं उसके उपप्रमुख राजू बारुआको पिछले वर्ष ४ दिसंबरको कॉक्सबाजारमें पकडा गया । तत्पश्चात मेघालयकी सीमापर असम पुलिसने उन्हें नियंत्रणमें लेकर बंदी बनाया । बांग्लादेशके मैमनसिंह एवं चितगाव जनपदमें उल्फाके छः तल थे । केवल बांग्लादेशसे मिलनेवाले सहायतासे नहीं; अपितु असममें स्थित घुसपैठियोंने उल्फाको किए सहकायोगके कारण यह साम्राज्य स्थापित हुआ था । ३० अक्तूबर २००९ को असममें हुए विस्फोटमें ८३ लोगोंकी मृत्यु एवं ३० लोग घायल हो गए थे । इसके पीछे उल्फा, एनडीएफबी एवं बांग्लादेशके हरकत-उल-जिहाद-अल्-इस्लामीका (हुजी) हाथ होनेकी आशंका है ।
सन्दर्भ – (निवृत्त) ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (साप्ताहिक विवेक, ८ अगस्त २०१०)

Tuesday, 8 July 2014

बांग्लादेशसे निर्वासित हिन्दुओंको पुनः बांग्लादेशमें भेजनेका विचार ?


आषाढ शुक्ल पक्ष दशमी/एकादशी, कलियुग वर्ष ५११६
असमके स्थानीय हिन्दुओंमें भाजपा शासनके विषयमें असंतोष
  •  ४ करोडसे अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियोंपर कोई कार्यवाही न कर निर्वासित हिन्दुओंपर अन्याय करनेवाला निर्णय लेनेकी इच्छा करनेवाली भाजपा सरकार !
  •  हिन्दुत्वनिष्ठोंद्वारा तीन दिनतक ‘असम बंद’ करनेकी चेतावनी !
  •  बांग्लादेशके धर्मांध मुसलमानोंके नियंत्रणसे मुक्त होकर आए हिन्दुओंको पुनः बांग्लादेशमें भेजना अर्थात कसाईयोंके हाथसे छूटी गायोंको पुनः कसाईके हाथोंमें देनेके समानही है ! क्या यह भाजपा शासनको समझमें आएगा ?

गोहत्ती (असम) – वर्तमान समयमें असममें ऐसा प्रचार चालू हो गया है कि असममें २५ मार्च १९७१ के पश्चात बांग्लादेशसे आए हिन्दू एवं मुसलमानोंको पुनः बांग्लादेशमें भेजा जाएगा । इस विषयमें केंद्र अथवा राज्य शासनद्वारा वैधानिक रुपसे कोई घोषणा नहीं हुई अथवा प्रस्ताव नहीं आया । लोकसभा चुनावके प्रचारके समय नरेंद्र मोदीने ‘घुसपैठि बांग्लादेशियोंको हकालकर हिन्दुओंका पुनर्वसन किया जाएगा’, ऐसी घोषणा की थी; परंतु अब भारी मात्रामें प्रचार होते समय भाजपाद्वारा कोई स्पष्टीकरण अथवा वस्तुस्थिति नहीं प्रस्तुत की गई है । अतः असमके स्थानीय हिन्दुओंमें भाजपा शासनके विषयमें असंतोष व्याप्त होने लगा है । (बांग्लादेशी घुसपैठियोंको वापस भेजनेका विषय संवेदनशील होते हुए केंद्रकी भाजपा सरकारने असममें फैली अफवाहोंके विषयमें मौन क्यों रखा है ? हिन्दुओ, सभी पक्ष एक समान होनेके कारण अपनी रक्षाके लिए स्वतंत्र राजनीतिक पक्ष स्थापित कर ‘हिन्दू राष्ट्र’ लाएं ! – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात ) इस अनुषंगसे ही ‘सारा असम बंगाली जातीय परिषद’ने जुलाईके अंतिम सप्ताहमें राजधानी नई देहलीमें धरना आंदोलन आयोजित किया है । पत्रकार परिषद आयोजित कर इस विषयको प्रस्तुत किया जाएगा । उसीप्रकार तीन दिनतक असम बंद करनेकी चेतावनी भी दी गई है ।
२००७ में कांग्रेसकी राज्यसरकारने एक निर्णयके आधारपर बांग्लादेशसे असम आए हिन्दू एवं मुसलमानोंके संदिग्ध व्यक्तियोंको ढूंढकर उनको कारागृहमें रखा है तथा पिछले कुछ दशक पूर्व यहां आए बांगलादेशी हिन्दूओंके विषमें अन्याय्य भूमिका अपनाई जा रही है । ऐसे हिन्दुओंको कारागृहसे मुक्त करनेकी मांग इस आंदोलनद्वारा की जाएगी, ऐसी जानकारी इस परिषदके प्रतिनिधि श्री. सुधेंदु मोहन तालुकदारने दी है । उसीप्रकार देहलीके आंदोलनमें सभी हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनोंको सम्मीलित होनेका आवाहन भी किया है । इस आंदोलनमें हिन्दू जनजागृति समिति सम्मीलित होंगी ऐसा समितिने सूचित किया है ।