Thursday, 17 August 2017

उत्तर प्रदेश : ATS के छापे में संदिग्ध बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार


आतंकी अब्दुल्ला
उत्तर प्रदेश एटीएस की टीम ने रविवार शाम संदिग्ध बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला को मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया है । पुलिस के अनुसार, अब्दुल्ला बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकी समूह ‘अंसारुल्ला बांग्ला टीम’ से जुडा हुआ है ।
गिरफ्तार अब्दुल्ला ने पूछताछ में एटीएस को बताया कि, वह फैज़ान की मदद से नकली आईडी बनाता है । इस सूचना के बाद एटीएस टीम ने देवबंद में फैजान के किराए के कमरे पर दबिश दी गई, परंतु वह वहां नहीं मिला ।
कमरे में तलाशी ली गई गई तो वहां से बांग्ला भाषा में जिहादी साहित्य, बम बनाने की विधि का साहित्य, कलर प्रिंटर, कई नकली आईडी मिले हैं । यह स्पष्ट हुआ है की फैजान भी बांग्लादेशी संदिग्ध आतंकी है और अंसारुल्ला बांग्ला टीम से जुडा है ।
एटीएस के अनुसार, अब्दुल्लाह ने भारत में आधार कार्ड और पासपोर्ट भी बनवा रखा था । वहीं आतंकियों को शरण देने और उनका पहचान पत्र बनाने का काम कर रहा था ।
बता दें, कि, आतंकी अब्दुल्लाह पिछले एक महीने से मुजफ्फरनगर में रह रहा था । उसने फर्जी आईडी की मदद से अपना पासपोर्ट भी बनवा रखा था । इससे पहले वह सहारनपुर में रह रहा था और यही रहते हुए उसने पासपोर्ट बनवाया था ।
अन्सारुल्ला बांग्ला टीम कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन द्वारा गठित किए गए आतंकवादी संगठन ‘अलकायदा’ से प्रेरित तन्जीम बताई जाती है ।
संदर्भ : न्युज १८

Sunday, 16 July 2017

बंगाल सांप्रदायिक हिंसा : तुष्टीकरण की राजनीति ने लोगों को बांट दिया है


आज बदुरिया में जो हो रहा है वो तुष्टीकरण की नीतियों का ही नतीजा है . . .

बदुरिया आज बांग्लादेश का ही हिस्सा लग रहा है। स्थानीय लोग अपने ही क्षेत्र में अजनबी हो गए हैं। पुलिस अब लडकियों से छेडखानी की शिकायत तक नहीं सुनती ! ३ जुलाई को जो हिंसा भडकी वो तो बस एक बहाना थी। असल में घुसपैठिये यहां बचे हुए पुराने लोगों को ये इलाका छोडकर भाग जाने की धमकी दे रहे हैं !
पश्चिम बंगाल में तकी रोड पर जब आप कोलकाता से बांग्लादेश सीमा पर घोजाडांगा पोस्ट की आेर बढते हैं, तो इस व्यस्त हाइवे पर लगभग ५० किलोमीटर चलकर बेराचंपा से एक दोराहा आता है। बाएं की ओर १४ किलोमीटर आगे चलते हुए आप बदुरिया कस्बे पहुंच जाते हैं।
बदुरिया की जनसंख्या लगभग ढाई लाख है। हाल ही में यहां हुए सांप्रदायिक दंगों की वजह से इसकी चर्चा हो रही है। बदुरिया की हिंसा का असर न केवल पूरे देश के सांप्रदायिक माहौल को बिगाड सकता है, बल्कि ये मामला देश की सुरक्षा से भी जुडा है !
आज से १६ वर्ष पहले बदुरिया आने पर मैंने देखा था कि, ये जगह एकदम शांत हुआ करती थी। जीवन की रफ्तार सुस्त थी। उस समय तकी रो़ड पर भी इतना ट्रैफिक नहीं हुआ करता था। हम अपनी दोपहिया गाडी पर भी आराम से चलते हुए बदुरिया पहुंचे थे।
हालांकि उस समय भी बदुरिया में शांत माहौल में आनेवाले तूफान के संकेत दिख रहे थे। जब १६ वर्ष पहले हम यहां आए थे, तो रमजान का महीना चल रहा था। नमाज के लिए हाइवे को बंद कर दिया गया था। हमें नमाज और इफ्तार पूरे होने तक हाइवे के किनारे स्थित एक चाय की दुकान पर रुकना पडा था।
थोडी देर में यह दुकान खचाखच भर गई थी। आमतौर पर देहली की सियासी इफ्तारों से अलग हमारे सुदूर गांव-कस्बों की इफ्तार शांत और सादी होती हैं। परंतु यहां रोजेदारों के लिबास और बोली दोनों ही साफ बताती थी कि, वे हिंदुस्तानी नहीं हैं !
बदुरिया में हमारे मेजबान ने हमारे शक पर मुहर लगा दी थी। वे लोग खुद बदुरिया के बदलते माहौल से परेशान थे। अपने ही क्षेत्र में वो अजनबी हो चुके थे। अवैध घुसपैठ के चलते बडी तादाद में बांग्लादेशी बदुरिया में आकर बस रहे थे। उस समय पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की सरकार थी। वामपंथी सरकार ने इस घुसपैठ की आेर से आंखें बंद की हुई थीं। वो बांग्लादेश से आए इन घुसपैठियों को वोटबैंक के तौर पर उपयोग कर रहे थे।
उस समय बदुरिया के लोग ममता बनर्जी को बडी उम्मीद की नजर से देखते थे। उन्हें लगता था कि ममता की सरकार बनी तो वो बांग्लादेशी घुसपैठियों पर लगाम लगाएंगी। उन्हें लगता था कि ममता के सत्ता में आने पर प्रशासन बेहतर होगा। हिंदू-मुसलमान के नाम पर भेदभाव नहीं होगा।
आज १६ वर्ष बाद बदुरिया के लोगों की उम्मीदें टूट चुकी हैं। आज ये क्षेत्र जंग का मैदान बन चुका है। १७ वर्ष के एक लडके की जिस फेसबुक पोस्ट की वजह से यहां पिछले सप्ताह जबरदस्त हिंसा हुई, वो तो बस बहाना थी। इस बार हमारे मेजबान बताते हैं कि जब हिंसा भडकी तो उन्हें बहुत डर लगा। इसीलिए वो बाकी देशवासियों को यहां के हालात के बारे में बताने को बेताब थे। उन्हें डर लग रहा था कि अगर कुछ किया न गया तो यहां बडा ‘हत्याकांड’ हो सकता है !

हालात बेहद खराब

स्थानीय लोग कहते हैं कि आज की तारीख में बदुरिया में हालात बेहद बिगड चुके हैं। यहां के ६५ प्रतिशत वोटर मुसलमान हैं। यहां पर सबसे ज्यादा जो इमारतें बन रही हैं वो मदरसे और मस्जिद हैं !
बदुरिया आज बांग्लादेश का ही हिस्सा लग रहा है। स्थानीय लोग अपने ही क्षेत्र में अजनबी हो गए हैं। पुलिस अब लडकियों से छेडखानी की शिकायत तक नहीं सुनती ! ३ जुलाई को जो हिंसा भडकी वो तो बस एक बहाना थी। असल में घुसपैठिये यहां बचे हुए पुराने लोगों को ये इलाका छोडकर भाग जाने की धमकी दे रहे हैं !
आज ये हालात ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के कारण से उत्पन्न हुए हैं। यहां के ज्यादातर लोग भारतीय नागरिक तक नहीं हैं ! दंगाइयों और हिंसा भडकानेवालों (जो फेसबुक पोस्ट लिखने के आरोपी लडके को फांसी पर लटकाने की मांग कर रहे थे) के प्रति नरमी दिखाकर ममता ने साफ कर दिया है कि वो सांप्रदायिक ताकतों के आगे झुक गई हैं। तभी तो उन्होंने यहां तीन दिन तक दंगाइयों को खुली छूट दे रखी थी और सुरक्षाबलों को उनसे निपटने से रोक रही थीं !
जब ममता बनर्जी को दंगाइयों से सख्ती से निपटना चाहिए था। जब उनकी जिम्मेदारी थी कि वो सांप्रदयिक ताकतों के विरोध में कडे कदम उठातीं, तो वो केंद्र सरकार से झगडा करने लगीं। मदद के लिए भेजी गई सुरक्षा बलों की टुकडियों को लौटा दिया। इसके बाद वो राज्यपाल पर आरोप लगाने लगीं !
ममता ने उन्हें भाजपा का सडकछाप नेता कह दिया और उन पर अपमानित करने का आरोप भी लगाने लगीं। इससे ममता बनर्जी की नीयत साफ हो गई। जाहिर है कि उनकी ये सियासी नौटंकी कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी नाकामी छुपाने के लिए ही थी। कानून का राज कायम करने के मोर्चे पर ममता बनर्जी बुरी तरह फेल हुई हैं !
इस हिंसा को राज्यपाल की ओर से ‘हस्तक्षेप’ की उपज बताने के उनके दांव को भले ही उनके समर्थक मान लें, परंतु इससे तो सांप्रदायिक ताकतों के हौसले बुलंद ही होंगे ! राज्य के दूसरे हिस्सों में भी दंगाइयों को ममता के रवैये से हौसला मिलेगा। बदुरिया में शरीयत के तहत सजा की मांग, केवल बंगाल ही नहीं, पूरे देश के लिए खतरे की घंटी है !
धर्म के नाम पर कत्ल करने पर उतारू भीड को सजा न मिलने से एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश होने के हमारे दावे पर दाग लगना तय है। किसी भी भीड का हिंसक तरीकों से अपनी मांग मंगवाना जायज नहीं। लोगों को कानून से खिलवाड की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए !

मीडिया पर भी सवाल

पश्चिम बंगाल की ताजा सांप्रदायिक हिंसा को लेकर वहां के मीडिया के रोल पर भी सवाल उठे हैं। सरकार के दबाव में या फिर चापलूसी की नीति के चलते किसी भी बडे मीडिया हाउस ने बदुरिया की हिंसा की घटना को प्रसिद्धि नहीं दी !
यूं लग रहा था कि मीडिया की इस शुतुरमुर्गी नीति से हालात खुद-ब-खुद ठीक हो जाएंगे। मगर ये उसी मीडिया की खामोशी थी, जो हाल के दिनों में देश के दूसरे हिस्सों में पीट-पीटकर हुई हत्याओं की घटनाओं पर खूब शोर मचा रहा था। गौरक्षकों की हिंसा को लेकर यही मीडिया छाती पीट रहा था। पश्चिम बंगाल के मीडिया को समझना होगा कि अपराधियों से निपटने के दो पैमाने नहीं हो सकते। अगर वो गौरक्षकों की हिंसा को लेकर शोर मचा रहे थे, तो उन्हें बदुरिया की सांप्रदायिक हिंसा पर भी आवाज उठानी चाहिए थी !
पाकिस्तान की तरह भारत अच्छे और बुरे आतंकवादी यानी अच्छे और बुरे दंगाइयों का फर्क नहीं कर सकता !
सवाल ये है कि, पश्चिम बंगाल में कालियाचक, धूलागढ़ और अब बदुरिया की सांप्रदायिक हिंसा क्या संकेत देती है ? पश्चिम बंगाल के बिगडते सांप्रदायिक माहौल के लिए यूं तो केवल ममता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। मगर मौजूदा सरकार होने की वजह से सबसे ज्यादा जवाबदेही उन्हीं की बनती है। इससे वो अपनी नौटंकीवाली सियासत करके पल्ला नहीं झाड सकतीं !
पूरे देश को मालूम है कि, वोट बैंक की राजनीति के चलते पश्चिम बंगाल में वामपंथी सरकारों ने बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की आेर से आंखें मूंदे रखीं। उस दौर में भारत-बांग्लादेश की सीमा पर जानवरों के बदले इंसानों की अदला-बदली का कारोबार आम था। सीमा की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एजेंसियां ये अवैध कारोबार रोकने में नाकाम रहीं !
इससे ही साफ है कि, हम देश की सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं ! हमारी नाकामी की सबसे बडी मिवर्ष यही है कि हमें यही नहीं पता कि बांग्लादेश से कितने लोगों ने अवैध तरीके से हिंदुस्तान में घुसपैठ की। आज हालात ये हैं कि खुद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चेताया है कि बांग्लादेश से आतंकी पश्चिम बंगाल में घुसकर पनाह ले रहे हैं। परंतु ममता ने शेख हसीना की चेतावनी को भी अनसुना कर दिया !
कोई भी सरकार जिसकी हालत पर नजर हो, जो देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर हो, वो घुसपैठ को लेकर बेहद सतर्क होगी। परंतु पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं हुआ। घुसपैठियों की तादाद बढ़ती रही। मुसलमानों की जनसंख्या पश्चिम बंगाल में जितनी तेजी से बढ़ी है, उतनी तेजी से देश के किसी भी हिस्से में नहीं बढ़ी। फिर भी वहां की सरकारें सोई रहीं !

क्या है इस हिंसा की जड में ?

आज पश्चिम बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या, आजादी से पहले के स्तर पर पहुंच रही है। १९४१ में पश्चिम बंगाल में २९ प्रतिशत मुसलमान जनसंख्या थी। आज ये आंकडा २७ प्रतिशत पहुंच गया है। जबकि देश के बंटवारे के बाद १९५१ में पश्चिम बंगाल में केवल १९.५ प्रतिशत मुसलमान थे। बंटवारे के बाद बडी तादाद में मुसलमान, पाकिस्तान चले गए थे।
हम मुसलमानों की जनसंख्या में बढोतरी के आंकडों पर गौर करें तो चौंकानेवाली बातें सामने आती हैं ! २००१ से २०११ के बीच पश्चिम बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या १.७७ प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ी। जबकि देश के बाकी हिस्सों में मुस्लिम जनसंख्या ०.८८ प्रतिशत की दर से बढ़ी !
यूं तो राजनीति में आंकडों की बहुत बात होती है। परंतु पश्चिम बंगाल की तेजी से बढ़ती मुस्लिम जनसंख्या की आेर से सब ने आंखें मूंद रखी थीं। सियासी फायदे के लिए देशहित की कुर्बानी दे दी गई। अगर हम आंकडों पर ध्यान देते तो फौरन बात पकड में आ जाती कि जिस बंगाल में कारोबार ठप पड रहा था, उद्योग बंद हो रहे थे, वहां लोग रोजगार की नीयत से तो जा नहीं रहे थे !
आज की तारीख में हम घुसपैठ के सियासी असर की बात करें तो, पश्चिम बंगाल के तीन जिलों में मुसलमान बहुमत में हैं। लगभग १०० विधानसभा सीटों के नतीजे मुसलमानों के वोट तय करते हैं। यानी मुस्लिम वोट, पश्चिम बंगाल की सियासत के लिहाज से आज बेहद अहम हो गए हैं। इसीलिए राज्य में ममता बनर्जी जमकर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं। उनसे पहले वामपंथी दल यही कर रहे थे !
तुष्टीकरण की गंदी सियासत का नमूना हमने २००७ के चुनावों में देखा था। उस समय अपनी तरक्कीपसंद राजनीति के बावजूद वामपंथी सरकार ने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को कोलकाता से बाहर जाने पर मजबूर किया। इसकी वजह ये थी कि बंगाल के कट्टरपंथी मुसलमान, तस्लीमा के शहर में रहने का विरोध कर रहे थे। आज का पश्चिम बंगाल सांप्रदायिक रूप से और भी संवेदनशील हो गया है !
ममता बनर्जी ने सांप्रदायिकता को अपना सबसे बडा सियासी हथियार बना लिया है। उनका आदर्शवाद सत्ता में रहते हुए उडन-छू हो चुका है। राज्य के २७ प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या को लुभाने के लिए ममता किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखती हैं। इसीलिए वो नूर-उल-रहमान बरकती जैसे मौलवियों को शह देती हैं !
ये वही बरकती है जिसने पीएम मोदी के विरोध में फतवा दिया था। बरकती ने कई भडकाऊ बयान दिए। वो लालबत्ती पर रोक के बावजूद खुले तौर पर अपनी गाडी में लालबत्ती लगाकर चलता था। परंतु ममता ने उसके विरोध में कोई एक्शन नहीं लिया। बाद में कोलकाता की टीपू सुल्तान मस्जिद के ट्रस्टियों ने बरकती को इमाम पद से जबरदस्ती हटाया।
इसी तरह ममता बनर्जी ने मालदा के हरिश्चंद्रपुर कस्बे के मौलाना नासिर शेख की आेर से आंखें मूंद लीं। इस मौलाना ने टीवी, संगीत, फोटोग्राफी और गैर मुसलमानों से मुसलमानों के बात करने पर पाबंदी लगा दी थी। राज्य के धर्मनिरपेक्ष नियमों के विरोध में जाकर ममता ने इमामों और मौलवियों को उपाधियां और पुरस्कार दिए हैं !
ममता ने मुस्लिम तुष्टीकरण की सारी हदें तोड दी हैं ! तभी तो दुर्गा पूजा के बाद ४ बजे के बाद मूर्ति विसर्जन पर, मुहर्रम का जुलूस निकालने के लिए रोक लगा देती हैं। उन्हें आम बंगालियों की धार्मिक भावनाओं का खयाल तक नहीं आता। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी सरकार के इस फैसले को अल्पसंख्यकों का अंधा तुष्टीकरण कहा था !
क्या ममता बनर्जी को ये समझ में आएगा कि मुस्लिम तुष्टीकरण से बंगाल में अब काजी नजरुल इस्लाम जैसे लोग नहीं पैदा होगे। बल्कि इससे इमाम बरकती और नसीर शेख जैसे मौलवियों को ही ताकत मिलेगी ! ये वही लोग हैं जो मुसलमानों की नुमाइंदगी का दावा करते हैं, मगर उन्हीं के हितों को चोट पहुंचाते हैं। ये सांप्रदायिकता फैलाते हैं !
आज बदुरिया में जो हो रहा है वो तुष्टीकरण की नीतियों का ही नतीजा है। कल यही हाल कोलकाता का भी हो सकता है !
ममता बनर्जी सांप्रदायिकता की ऐसी आग से खेल रही हैं, जिस पर काबू पाना उनके बस में भी नहीं होगा !
स्त्रोत : फर्स्ट पोस्ट

Saturday, 15 July 2017

भारत रक्षा मंच के मुरली मनोहर शर्माजी द्वारा व्यक्त बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या की वास्तविक भीषणता !


१४ जून को अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के सायंकाल के सत्र में मान्यवरोंद्वारा व्यक्त किए गए विचार

षष्ठ अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन में भारत रक्षा मंच (ओडिशा) के राष्ट्रीय सह-संयोजक मुरली मनोहर शर्मा ने उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को उद्बोधित करते हुए कहा कि, आनेवाले समय में देश का प्रधानमंत्री कौन होगा, यह बांग्लादेशी घुसपैठिए निश्‍चित करेंगे !
१. देश में सर्वाधिक घुसपैठिए बांग्लादेशी हैं । उनके लिए नौकरी, पैन कार्ड, मतदान परिचय पत्र आदि अनेक सुविधाएं बनाकर देने में दलाल तत्काल तैयार रहते हैं । शासन की सर्व प्रकार की योजनाएं और सुविधाएं उनके लिए लागू की जाती हैं । इस प्रकार घुसपैठ करनेवाले केवल देश लूटने के लिए ही आए होते हैं ।
२. इसके विपरीत बांग्लादेशी हिन्दू देश में आश्रय के लिए आते समय वैध मार्ग से आता है; परंतु उसकी प्रविष्टी बांग्लादेश से आया हुआ की जाती है । इसलिए उसे देश की नागरिकता शीघ्र नहीं मिलती ।
३. अन्य देशों की तुलना में अपने देश में शरणार्थियों को सर्वाधिक सुविधाएं दी जाती हैं ।
४. आनेवाले काल में देश का प्रधानमंत्री कौन होगा, यह निर्णय बांग्लादेशी घुसपैठिए करेंगे, ऐसी भयावह स्थिति उत्पन्न होगी ।
५. देश में कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, इसकी संख्या शासन भी नहीं दे सकता ।  ऐसे घुसपैठिए देशभर में फैले हुए हैं तथा उन्हें देश से भगाना सरल नहीं है । ६. यह समस्या बढ रही है तथा वह गंभीर है । कल वे अपना एक अलग देश मांग सकते हैं ।

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के संबंध में श्री. मुरली मनोहर शर्माजी के  गौरवोद्गार

हिन्दू अधिवेशन का रूपांतरण वटवृक्ष में हो रहा है ! अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन जब पहली बार आयोजित किया था, उस समय  ५ से अधिक राज्यों के हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन सम्मिलित हुए थे । आज का अधिवेशन  देश-विदेश के १३२ से अधिक संगठनों ने एकत्रित आकर आयोजित किया है । इसके द्वारा अधिवेशन का रूपांतरण अब वटवृक्ष में हो रहा है । सनातन संस्था और हिन्दू  जनजागृति समिति सभी को एकत्रित कर हिन्दू राष्ट्र की दिशा में मार्गक्रमण कर रही है । अधिवेशन में आए हुए प्रत्येक को हिन्दू राष्ट्र लाने और उसका प्रसार करने का दायित्व निभाना पडेगा । प्रत्येक को हिन्दू ध्वज सात समुद्र पार जाकर फहराना है ।

उद्बोधन सत्र में पारित प्रस्ताव


केंद्रशासन देश में अवैध रूप से वास्तव्य करनेवाले बांग्लादेशी घुसपैठियों को उनके देश में लौटाने का कानून तत्काल बनाए ।
बांग्लादेश से प्रतिदिन भारत में आनेवाले बांग्लादेशी नागरिकों के लिए काम करने की अनुमति (वर्क परमिट) देनेवाला कानून संसद में पारित हो ।
दंगों के पश्‍चात पीडितों को हानिभरपाई देने के लिए नियुक्त की गई पूछताछ समिति में हिन्दुत्वनिष्ठों को भी सम्मिलित किया जाए ।
गत ५ वर्षों में हिन्दुआें के विरोध में हुए दंगों में पीडितों का पुनर्वसन, उन्हें दी जानेवाली सहायता राशि की योग्यता-अयोग्यता और उस पर हुई प्रत्यक्ष कार्यवाही की पूछताछ के लिए एक समिति नियुक्त की जाए । उस समिति की सिफारिशों के अनुसार दंगे पीडितों को सहायता राशि दी जाए ।
दंगों में जिन हिन्दुआें के घर नष्ट हो गए हों, उनका पुनर्वसन किया जाए ।
स्वतंत्रता के पश्‍चात आज तक हुए दंगों में मृत हुए मुसलमानों के लिए उनके परिजनों को दी गई सहायता राशि में जो सर्वाधिक सहायता राशि हो, उतनी ही राशि मृत हिन्दू के परिजनों को दी जाए ।  उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों ने ये सभी प्रस्ताव ‘जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम ।’ के  जयघोष में हाथ उठाकर पारित किए ।

Wednesday, 28 June 2017

मुंबई : पिछले ३० वर्षों से अवैध तरीके रहनेवाले ३ बांग्लादेशी गिरफ्तार


मुंबई : शिवाजी नगर पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीसी) द्वारा गोवंडी के रफीक नगर से एक महिला समेत तीन बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी कीया गया है। सभी आरोपी गैरकानूनी तरीके से पिछले ३० वर्षों से मुंबई में रह रहे थे। पुलिस की गिरफ्त में आए इन बांग्लादेशी नागरिकों का नाम जाकिर सगीर हुसैन (५२), सुल्ताना जाकिर हुसैन (३८) और खुशाब जाकिर हुसैन (२१) हैं, जो गोवंडी में दर्जी का काम करते हैं।
पुलिस ने आईपीसी की धारा ४२०, ४६५, ४६७, ४६८, ४७ और ३१ के अलावा पासपोर्ट ऐक्ट के तहत मामला दर्ज कर इन्हें स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि, गोवंडी, शिवाजी नगर, मानखुर्द और चेंबूर बांग्लादेशियों के लिए सबसे आसान जगह बन गई है। यह कार्रवाई २३ जून को की गई थी।

फर्जी दस्तावेज बरामद

शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारी नारायण तुरकुंडे के अनुसार, तीनों आरोपी गोवंडी के शिवाजी नगर स्थित रफीक नगर में रहते थे। पेशे से दर्जी का काम करते हैं। गुप्त सूचना के आधार पर जब कार्रवाई की गई, तो पाया गया कि, तीनों आरोपियों के जन्म प्रमाणपत्र फर्जी हैं।
ये लोग ऐसे ही फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नकली मतदान कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड एवं अन्य दस्तावेज बना कर भारत में गैरकानूनी तरीके से रहने लगते हैं। पुलिस ने सोशल सर्विस ब्रांच की मदद से कार्रवाई को अंजाम दिया है। गोवंडी, शिवाजी नगर, मानखुर्द जैसे क्षेत्र में पुलिस अक्सर कॉम्बिंग ऑपरेशन चला कर गैरकानूनी तरीके से रहने वालों को गिरफ्तार करती रहती है।

पहले भी पकडे गए हैं बांग्लादेशी

स्थानीय सूत्र बताते हैं, ‘गोवंडी, शिवाजी नगर और मानखुर्द पुलिस की हद में अभी भी सैकडों बांग्लादेशी गैरकानूनी तरीके से रह रहे हैं। जब इनकी जांच की जाती है तो ये लोग भारतीय कागजात दिखाकर पुलिस से बच निकलते हैं। हालांकि, पुलिस अब इन बांग्लादेशियों के विरुध्द सख्त कार्रवाई करने के तयारी में हैं। इनके दस्तावेजों की भी बारीक जांच-पडताल की जा रही है।
शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन के एटीसी अधिकारी सतीशचंद्र राठौड के अनुसार, पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के दस्तावेज की जांच रही है। हमारे पुलिस हवलदार नवनाथ लोंडे, नलावडे और झेरडे ने इससे पहले भी पांच ऐसे आरोपियों को सोशल ब्रांच की मदद से गिरफ्तार किया था, जो गैरकानूनी तरीके से गोवंडी में छुपे हुए थे।
स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

Saturday, 25 March 2017

बांग्लादेश से भागकर बंगाल, असम व त्रिपुरा में शरण ले रहे आतंकी : रिपोर्ट


कोलकाता : बांग्लादेश सरकार की एक रिपोर्ट पश्चिम बंगाल सरकार और भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है। बांग्लादेश सरकार द्वारा भारतीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि बंगाल, असम और त्रिपुरा में आतंकी नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।
बांग्लादेश में सक्रिय कई आतंकी संगठनों को इन राज्यों में पनाह मिल रही है। बांग्लादेश और भारत की सीमा के आर-पार जाना आसान है। आतंकी इसी का फायदा उठाकर बंगाल में घुसपैठ कर रहे हैं। बंगाल की लगभग २२००० किलोमीटर की सीमा बांग्लादेश से लगी है। हरकत-उल-जिहादी अल-इस्लामी और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश सीमा पर कमजोर सुरक्षा का फायदा उठा रहे हैं। बंगाल की सीमा से भारत में घुसपैठ करने वाले कई आतंकियों के अलकायदा व इस्लामिक स्टेट से भी संबंध बताए जाते हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में वर्ष २०१६ में जमात-उल-मुजाहिदीन और हरकत-उल-जिहादी अल इस्लामी यानी हूजी के कई आतंकियों ने घुसपैठ की है। खुफिया रिपोर्ट बताती हैं कि, इन दोनों संगठनों के दो हजार से ज्यादा आतंकियों ने भारत में घुसपैठ की। इनमें से ७२० पश्चिम बंगाल के रास्ते से पहुंचे हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल के अधिकारी इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हैं।
इन आंकड़ों पर विश्वास न भी करें तो भी जिस तरह से बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है, वह बेहद खतरनाक है।
पिछले वर्ष जुलाई में ढाका के गुलशन कैफे में हुए धमाके का एक मास्टरमाइंड बंगाल के एक होटल में ठहरा था। इस आतंकी हमले के तार सीधे आईएस (इस्लामिक स्टेट) से जुड़े थे। आतंकी हमला बांग्लादेशी मूल के कनाडाई नागरिक तमीम चौधरी ने कराया था। बाद में वह खुद भी बांग्लादेश पुलिस को हाथों मारा गया था।
माना जाता है कि, तमीम और जेएमबी (जमात–उल मुजाहिदीन बांग्लादेश) का आतंकी मोहम्मद सुलेमान, ढाका हमले से पहले भारत आए थे। यहां वे मालदा जिले में भारत के अबू मूसा से मिले थे। सुलेमान और उसके साथ आया तमीमी, बंगाल के एक होटल में ठहरे थे। बंगाल मे इस आतंकी नेटवर्क का एक और सबूत उस समय मिला जब कोलकाता पुलिस ने ढाका के गुलशन कैफे में हुए हमले के एक आरोपी इदरिस अली को गिरफ्तार किया।
इदरिस अली को कोलकाता के बड़ा बाजार क्षेत्र से पकड़ा गया था। कोलकाता पुलिस को इदरिस के बड़ा बाजार में होने की जानकारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिली थी। बंगाल में अवैध घुसपैठियों की दिक्कत राजनैतिक भी है और सुरक्षा का मामला भी।
स्त्रोत : जागरण

Sunday, 7 August 2016

बांग्लादेशी गाय तस्कर सीमा क्षेत्र में जुए के अड्डों में लूट रहे है पैसे !


  • दिन भर जुए के अड्डों में मौज मस्ती व खाना पीना आैर रात को गायों को लेकर जा रहे है बांग्लादेशी
  • सीमावर्ती हबीबपुर थाना क्षेत्र के आग्रा हरिश्चंद्रपुर, तालतली, पान्नापुर, सहित कई गांवों में चल रहा है अड्डा
  • स्थानीय पान की दुकान में बांग्लादेशी व भारतीय रुपयों का चल रहा लेन देन
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मालदा : मालदा के भारत बांग्लादेश सीमावर्ती हबीबपुर व बामनगोला थाना क्षेत्र में खुलेआम जुए का अड्डा चल रहा है। सीमा पार कर बांग्लादेशी जुआरी जुआ खेलने के लिए यहां आ रहे हैं। जिसमें लाखों रुपये का खेल चल रहा है। जिला प्रशासन को दी गई एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर जिला पुलिस सतर्क हुर्इ है।
बुधवार रात को सीमावर्ती बामनगोला, हबीबपुर सहित जिले के विभिन्न थाना क्षेत्र में जिला पुलिस ने अभियान चलाकर सात जुआरीयों को गिरफ्तार किया। इनके पास से मोटी रकम बरामद हुई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पिछले १८ जुलाई को मालदा के भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती बामनगोला क्षेत्र के निवासी नीरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने बामनगोला प्रखंड के बीडीओ कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज की। जिसमें उन्होंने बताया कि उनके घर के पास पिछले कई महीनों से जुए के कई अड्डे चल रहे हैं। क्षेत्र के गाय तस्कर ये जुए के अड्डे चला रहे हैं। जिसमें सीमा पार कर बांग्लादेशी जुआरी पहुंच रहे हैं। यह शिकायत मिलने के बाद ही प्रखंड प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी व जिला पुलिस प्रशासन को भेजी गई। इसके बाद ही प्रशासन हरकत में आई।
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पुलिस ने जांच शुरू की। इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। पुलिस को पता चला कि भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती हबीबपुर थाना क्षेत्र के आग्रा हरिश्चंद्रपुर, तालतली, पान्नापुर, केदारीपाड़ा, टिकियापाड़ा, बामनगोला थाने के खुटादह, बटली सहित विभिन्न गांवों में ये जुए के अड्डे लग रहे हैं। खासकर भारतीय गाे-तस्कर यहां जुए के अड्डे लगा रहे हैं। जिसमें सीमा पार कर बांग्लादेशी गाय तस्कर भाग ले रहे हैं। दिनभर जुए का अड्डा चलते रहता है। खाना पीना भी यहीं होता है। रात को ये तस्कर सीमा पार कर बांग्लादेश चले जाते हैं। इन गाय तस्करों के हाथों में रुपये रहने से इन्हें जुआ खेलने में कोई दिक्कत नहीं होती।
रात को ही बांग्लादेश से तस्करों का एक दल घुस रहा है जो दिन भर इसी तरह जुआ खेल कर दिन काट रहा है। गाय तस्करी का काम भी यही से हो रहा है। क्षेत्र के कई पान की दुकान में बांग्लादेशी व भारतीय रुपयों का लेनदेन का काम चल रहा है। यहीं से भारतीय व बांग्लादेशी रुपये तस्कर ले रहे हैं ।
मालदा के हबीबपुर थाना क्षेत्र के बेलडांगा क्षेत्र से केदारीपाड़ा क्षेत्र तक विस्तृत क्षेत्र में कंटीली तार का बाड़ नहीं लगा है। बीच से पुनर्भवा नदी बहती है । बारिश के समय में यह नदी भयंकर रूप ले लेती है। क्षेत्र की स्थिति भी खराब हो जाती है। इसका फायदा उठाकर क्षेत्र में गायों की तस्करी बढ जाती है। इतने दिनों तक बांग्लादेशी तस्करों के सीमा पार कर गायों को लेकर बांग्लादेश चले जाते थे, अब भारतीय गांव में बैठकर जुए के अड्डे में शामिल हो रहे हैं। इसे लेकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी जुआरी बांग्लादेश के नौगां व चापाइ नबाबगंज जिले के रघुरामपुर, सपाहार, कोर्सा, जबाईबिल, रोहनपुर, बदलगाछी, आक्केलपुर, बातकीपाड़ा, बामाइल व डांगापाड़ा जैसे सीमावर्ती गांवों के निवासी हैं। बिना बाड की इस सीमा ये वे बीएसएफ की आंखों में धूल झोंककर भारत में प्रवेश कर रहे हैं।
स्त्रोत : जागरण

Monday, 18 April 2016

भाजपा का मिशन असम : रोकेंगे बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ


गुवाहटी : असम में अवैध घुसपैठ को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाते हुए बीजेपी ने आज अपने दृष्टिपत्र में यह सुनिश्चित करने का वादा किया कि भारत-बांग्लादेश सीमा सील की जाएगी।
असम विधानसभा चुनाव के लिए दृष्टिपत्र जारी करते हुए बीजेपी ने मुख्यमंत्री तरुण गोगोई पर घुसपैठ को बढ़ावा देने और राज्य की जनसांख्यिकी नष्ट करने का आरोप भी लगाया। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने गोगोई सरकार पर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने घुसपैठ को बढ़ावा देकर राज्य की जनसांख्यिकी को बदलने तथा नष्ट करने की कोशिश की। कांग्रेस कई दशकों से ऐसा कर रही है और उसने कोई कार्रवाई नहीं की। असम में चार अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी का दृष्टिपत्र जेटली ने जारी किया।
दृष्टिपत्र में बीजेपी ने सत्ता में आने पर राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा को सील करने के लिए केंद्र के साथ मिलजुलकर काम करने का वादा किया है। साथ ही पार्टी ने लोगों से वादा किया कि घुसपैठियों को रोजगार देने वाले उद्योगों, कारोबारियों, छोटे और मध्यम उद्यमों तथा अन्य एजेंसियों के साथ कठोरता से निपटने के लिए एक कानून बनाया जाएगा।
राज्य के लिए फंड में केंद्र सरकार द्वारा कटौती किए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर जेटली ने कहा कि असम को उच्च कर अवमूल्यन के कारण वर्ष २०११-२०१५ की तुलना में वर्ष २०१६-२०२० के दौरान १४८ फीसदी अधिक रकम मिलेगी। जेटली ने कहा कि असम को कर अवमूल्यन के तौर पर १,४३,२३९ करोड़ रुपए मिलेंगे जैसा कि १४वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है, जबकि १३वें वित्त आयोग के दौरान राज्य को ५७,८५४ करोड़ रुपए मिले थे। उन्होंने कहा कि इसलिए लोगों को गुमराह करना बंद करें। असफल सरकार अपनी असफलता छिपाने के लिए बहाने खोज रही है।
स्त्रोत : पत्रिका