कोलकाता पुलिस ने एक रैकेट के नौ सदस्यों को किया गिरफ्तार
लालबाजार के एआरएस की टीम ने की थी छापेमारी
गिरफ्तार गिरोह में सात भारतीय व दो बांग्लादेशी व्यक्ति शामिल
बांग्लादेश से अवैध तरीके से सीमा पार करवाकर उनके भारतीय होने के बनाते थे कागजात
कोलकाता : बांग्लादेश से अवैध तरीके से सीमा पार करवाकर अवैध तरीके से भारतीय कागजात और पासपोर्ट बनाकर लोगों को नौकरी के लिए विभिन्न देशों में भेजनेवाले गिरोह के कुल नौ सदस्यों को लालबाजार के एंटी राउडी स्क्वाड (एआरएस) की टीम ने गिरफ्तार किया है ! गिरफ्तार आरोपियों में सात भारतीय व दो बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। पुलिस के हाथ लगे आरोपियों के नाम शेख जहांगीर उर्फ सजन प्रसाद, मोहम्मद नशीरुद्दीन उर्फ नसरू, शेख शफीक, वशीम अहमद, महिरुद्दीन मोल्लाह और शेख अजीज हैं।
जबकि गिरफ्तार बांग्लादेशियों में मानिक हुसैन व रंजन शेख हैं। इनके पास से भारी संख्या में फर्जी कागजात व नकली पासपोर्ट पुलिस के हाथ लगे हैं। कोलकाता पुलिस के संयुक्त आयुक्त (अपराध) प्रवीण त्रिपाठी ने बताया कि काफी दिनों से खबर मिल रही थी कि सीमा पर सक्रिय दलालों की मदद से अवैध तरीके से बांग्लादेश से भारतीय सीमा में लोगों को प्रवेश करवाकर कुछ लोग उनके लिए भारतीय कागजात बना रहे हैं।
इसके बाद उनके नाम पर पासपोर्ट बनवाकर भारतीय पासपोर्ट की मदद से इन नागरिकों को नौकरी के लिए विदेश भेजने की कोशिश की जा रही थी। इस जानकारी के बाद डलहौसी से इस गैंग के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार कर पूरे मामले में दो बांग्लादेशी समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
प्राथमिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि हाल के दिनों में बांग्लादेशी पासपोर्ट के जरिये विदेश में नौकरी पर जाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण सीमा पार कर भारत में प्रवेश करवाकर भारतीय नागरिक होने के कागजात फर्जी तरीके से बनवाकर इन लोगों को भारत से सेंजेन विजा की मदद से नौकरी के लिए युरोपियन देशों में भेजने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है।
रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों में एक साल में पैदा होंगे ६०,००० बच्चे, गंभीर खतरे का डर !
February 27, 2018
रोहिंग्या संकट . . . अब तक का सबसे बडा मानवीय संकट ! – विश्व स्वास्थ्य संघटन की दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल
नई देहली : अगले एक वर्ष में रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में ६०,००० बच्चों के जन्म लेने का अनुमान है ! इन बच्चों के जन्म लेने के बाद संकट झेल रहे इस समुदाय की स्थिति और विकट हो सकती है !
विश्व स्वास्थ्य संघटन (WHO) की दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल ने छह महीने पहले शुरू हुए रोहिंग्या संकट को अब तक का सबसे बडा मानवीय संकट बताते हुए कहा कि आगामी मानसून सीजन में इन शरणार्थियों की दिक्कतें और बढनेवाली हैं ! अकेले बांग्लादेश में लगभग १० लाख रोहिंग्या शरणार्थी पनाह लिए हुए हैं, जो कुपोषण के साथ-साथ मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं जिनमें सर्वाधिक दयनीय स्थिति बच्चों की है !
संकट अब अपने चरम पर
डॉ. पूनम खेत्रपाल
डॉ. पूनम ने कहा, “२५ अगस्त, २०१७ से शुरू हुआ यह संकट अब अपने चरम पर पहुंच गया है । म्यांमार से बांग्लादेश बडी तादाद में पहुंचे रोहिंग्याओं की हालत रोंगटे खडे कर देनेवाली है ! बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के शरणार्थी शिविरों में ६,८८,००० रोहिंग्या रह रहे हैं, जबकि इससे पहले यहां २,१२,५०० रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंच चुके हैं । इस अल्पावधि में पलायन करनेवाली यह अब तक की सबसे बडी जनसंख्या है !”
सबसे बडा खतरा स्वास्थ्य को लेकर
शरणार्थी शिविरों में रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति और समस्याओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, “रोहिंग्या शरणार्थियों की सबसे बडी आबादी काटुपालोंग और बालुखली शिविरों में दयनीय हालत में रह रही है, परंतु सबसे बडा खतरा इनके स्वास्थ्य को लेकर है, इसलिए इनके स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने की जरूरत है । महिलाओं और कम उम्र की मांओं को प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की जरूरत है !”
बारिश का मौसम बनेगा बडा संकट
पूनम कहती हैं, “हालात इतने बदतर हैं कि ये पानी और स्वच्छता जैसी मूलभूत सेवाओं से वंचित हैं, परंतु हमें चिंता है मानसून सीजन को लेकर ! बारिश का मौसम इनके लिए बडा संकट बन सकता है । बारिश, तूफान, बाढ के खतरे से इन लोगों में हैजा, हेपेटाइटिस, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढेगा । वहीं, इन शरणार्थी शिविरों में अगले एक साल में ६०,००० बच्चों के पैदा होने का अनुमान है । समझ जाइए, स्थिति क्या होने जा रही है !”
जरूरी सेवाएं मुहैया कराने के लिए प्रयासरत
ऐसे में डब्ल्यूएचओ की रणनीति क्या है ? यह पूछने पर में डॉ. खेत्रपाल कहती हैं, “डब्ल्यूएचओ बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर कॉक्स बाजार में रोहिंग्या मुसलमानों की इस बडी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रही हैं । डब्ल्यूएचओ चिकित्सा केंद्रों में दवाइयां, मेडिकल उपकरण जैसी सेवाएं मुहैया कराने में लगा है !”
डॉ. ने कहा, “यहां १०० से अधिक साझेदारों के साथ मिलकर हेल्थ पोस्ट, अस्पताल, चिकित्सा केंद्रों और मोबाइल क्लीनिकों तक पहुंच बनाई जा रही है । शरणार्थियों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है । ये समुदाय ट्रॉमा, दिल संबंधी बीमारियों, मधुमेह और कई तरह की बीमारियों की चपेट में है !”
टीकाकरण कार्यक्रम शुरू
डब्ल्यूएचओ ने कई तरह के टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनके बारे में डॉ. खेत्रपाल कहती हैं, “हमने हैजे को लेकर अक्टूबर और नवंबर २०१७ में दो चरणों में व्यापक अभियान शुरू किया, जिसके तहत हैजा की ९००,००० खुराकें पिलाई गईं । इसके साथ ही सितंबर और नवंबर में खसरे और रूबेला टीकाकरण का अभियान शुरू हुआ, जिसमें १५ साल तक की उम्र के ३,३५,००० बच्चों का टीकाकरण किया गया । इसके साथ ही पोलियो और न्यूमोनियो के टीके लगाए गए । डिप्थीरिया के भी दो टीकाकरण अभियान शुरू किए गए । पहले दौर के तहत लगभग ५००,००० बच्चों का टीकाकरण हुआ । दूसरे चरण के तहत लगभग ३,९८,००० बच्चों का टीकाकरण किया गया । मार्च में डिप्थीरिया के टीकाकरण का तीसरा दौर शुरू करने की योजना है !”
बच्चों की मानसिक स्थिति चिंताजनक
डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक कहती हैं, “इन शरणार्थी बच्चों की मानसिक स्थिति चिंताजनक है । इस संकट का इन पर बुरा असर पडा है । हम स्वास्थ्य मंत्रालय और आपदा प्रबंधन मंत्रालय के साथ मिलकर रोहिंग्या शिविरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रहे हैं । प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए स्वास्थ्य योजनाओं का खाका तैयार हो रहा है । दूषित पानी की जांच के लिए लैब की स्थापना की गई है । ट्यूबवेल एवं घरेलू कंटेनरों में जल की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है । डब्ल्यूएचओ ने किसी भी तरह की बीमारी का पता लगाने के लिए अर्ली वार्निग एंड रिस्पांस प्रणाली स्थापित की है !”
डॉ. पूनम खेत्रपाल ने कहा, “हम काम कर रहे हैं, परंतु बेहतर होगा कि शरणार्थियों के भविष्य पर गंभीरता से फैसला लिया जाए !”
नई देहली : सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बुधवार (२१ फरवरी) को कहा कि पूर्वोत्तर को अशांत रखने के लक्ष्य के साथ पाकिस्तान द्वारा चीन के सहयोग से चलायी जा रहे परोक्ष युद्ध के तहत वहां ‘योजनाबद्ध’ तरीके से बांग्लादेश से लोगों को भेजा रहा है । असम के कई जिलों में मुस्लिम जनसंख्या में वृद्धि की खबरों का हवाला देते हुए सेना प्रमुख ने बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ की भी चर्चा की और कहा कि राज्य में उसका उभार १९८० के दशक से भाजपा के विकास से अधिक तेज रहा ।
जनरल रावत ने पूर्वोत्तर में बांग्लादेशों के प्रवासन का उल्लेख करते हुए कहा, ‘हमारे पश्चिमी पडोसी के चलते योजनाबद्ध तरीके से प्रवासन चल रहा है । वे हमेशा प्रयास और यह सुनिश्चित करेंगे कि परोक्ष युद्ध के जरिए इस क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया जाए ।’ वह पूर्वोत्तर क्षेत्र में सीमाओं को सुरक्षित बनाने के विषय पर एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे ।
उन्होंने कहा, ‘मैं समझता हूं कि हमारा पश्चिमी पडोसी इस क्षेत्र को समस्याग्रस्त बनाए रखने के लिए हमारे उत्तरी पडोसी (चीन) की मदद से बहुत अच्छी तरह परोक्ष युद्ध खेलता है । हमें कुछ और प्रवासन नजर आयेंगे । हल समस्या की पहचान और समग्र दृष्टि से उसपर गौर करने में निहित है ।’ असम में अवैध बांग्लादेशियों से प्रवासन एक बडा मुद्दा है और राज्य सरकार राज्य में अवैध ढ़ंग से रह रहे लोगों का पता लगाने के लिए अब राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर ला रही है ।
पश्चिम बंगाल की सीमा के साथ बांग्लादेश का करीब २ हज़ार किलोमीटर लंबी सीमा लगी हुर्इ है। इनमें से कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां सुरक्षा की व्यवस्था कमज़ोर हैं और घुसपैठ करवानेवाले लोग इसी का फायदा उठाते हैं !
अगर आपके घर में कुछ लोग . . . बिना आपकी अनुमती के घुस जाएं और आपके घर के सामान का उपयोग करने लगे तो आपको कैसा लगेगा ? . . . ज़ाहिर है आप घबरा जाएंगे और आपको इस घुसपैठ पर बहुत गुस्सा भी आएगा . . . इसके बाद आप इस बात की शिकायत पुलिस से और सिस्टम चलानेवाले लोगों से करेंगे। किंतु सिस्टम आपकी मदद करने की अपेक्षा घुसपैठ करनेवालों की मदद करने लगे तो आपके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा ! रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ पर हमारे देश के सिस्टम का कुछ ऐसा ही हाल है ! पश्चिम बंगाल में संगठित तरीके से बांग्लादेश सीमा से रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ कराई जा रही है। आज हमने सिस्टम की आंखें खोलने के लिए उन इलाकों से रिपोर्ट तैयार की है जहां रोहिंग्या मुसलमान सुरक्षा बलों को चकमा देकर अवैध रूप से भारत की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं ।
प्रश्न ये है कि रोहिंग्या मुसलमान . . . हमारे सिस्टम में अपनी जगह बनाने में कामयाब कैसे हो गये ? वो कौन से लोग हैं जो राजनीतिक फायदे के लिए रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध रूप से हर तरह की मदद दे रहे हैं ? क्या इस तरह घुसपैठ करवाकर . . . जनसंख्या के अनुपात और वितरण को बदलने की कोशिश हो रही है ? हैरानी की बात ये है कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बॉर्डरवाले इलाकों में कुछ अपराधी इतने सक्रिय हैं कि वो रोहिंग्या मुसलमानों को बड़े आराम से बॉर्डर पार करवा रहे हैं। इस काम के लिए इन लोगों ने Rate Card भी तैयार किया हुआ है !
बॉर्डर पार कराने के लिए तस्कर …. लोगों से २० हज़ार से २५ हज़ार रुपये लेते हैं . . . जबकि बच्चों के लिए ये रेट २ से ५ हज़ार रुपये तक है। हालांकि, कई बार बच्चों की घुसपैठ का रेट उनकी उम्र पर भी निर्भर करता है . . . परिवार को घुसपैठ कराने के बदले इस रैकेट में शामिल तस्कर डिस्काउंट भी ऑफर करते हैं . . . अगर ५ लोगों का परिवार है तो परिवार को डिस्काउंट दिया जाता है . . . और पूरे परिवार से ७५ हज़ार से ८० हज़ार रुपये तक लिए जाते हैं . . . यानी पूरे परिवार की घुसपैठ पर २० से २५ हज़ार का डिस्काउंट मिलता है !
पश्चिम बंगाल की सीमा के साथ बांग्लादेश का करीब २ हज़ार किलोमीटर लंबा . . . बॉर्डर लगा हुआ है। इनमें से कई इलाके ऐसे हैं जहां सुरक्षा के इंतज़ाम कमज़ोर हैं और घुसपैठ करवानेवाले लोग इसी का फायदा उठाते हैं। घुसपैठ के बाद पश्चिम बंगाल पहुंचनेवाले रोहिंग्या मुसलमानों को संघटित तरीके से बसाने के इंतज़ाम भी किये जाते हैं !
इन लोगों को UNHRC कार्ड यानी United Nations High Commissioner for Refugees कार्ड मिल जाता है।। इस कार्ड की मदद से ये लोग शरणार्थी बन जाते हैं। आप इस कार्ड को Refugee बनने का लाइसैंस भी कह सकते हैं। कार्ड मिलने के बाद रोहिंग्या मुसलमान देश के दूसरों इलाकों में बस जाते हैं और धीरे-धीरे आपके हिस्से के संसाधनों का इस्तेमाल करने लगते हैं। भारत में करीब ४० हज़ार रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से रहते हैं। ये लोग घुसपैठ करके बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते भारत में दाखिल हुए, और फिर देश के कई राज्यों में फैल गए।
हैरानी की बात ये है कि केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि रोहिंग्या मुसलमानों से देश की सुरक्षा को खतरा है। क्योंकि बहुत से आतंकवादी संघटन रोहिंग्या मुसलमानों के संपर्क में है। लेकिन इसके बावजूद इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ज़ाहिर है हमारा सिस्टम इस मामले राजनीति और धर्म के चश्मे से देख रहा है . . . जिससे वोट बैंक के खूबसूरत दृश्य नज़र आते हैं ! लेकिन देश की सुरक्षा से जुड़ी ख़बरों को लेकर ज़ी न्यूज़ हमेशा चौकन्ना रहता है। हमने देश की आंखें खोलने के लिए पश्चिम बंगाल के कई इलाकों से Ground Report तैयार की है . . . जो आपको देखनी चाहिए !
कोलकाता : एसटीएफ के हाथों पकड़े गए अलकायदा के तीनों आतंकियों शमशाद, रियाज और शहादत से पूछताछ में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं । शहादत से गहन पूछताछ में पता चला है कि, वे लोग सितंबर के आखिरी सप्ताह और अक्टूबर के पहली सप्ताह के बीच उत्तर २४ परगना जिले (पश्चिम बंगाल) के बशीरहाट स्थित गाछाग्राम से लगी बांग्लादेश की सीमा से भारत में घुसे थे ।
यह वही क्षेत्र है जहां से पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश में गायों की तस्करी होती है । आतंकियों को भी सीमा पार करवाने के लिए इसी कॉरीडोर का उपयोग किया जाता है । पांच-पांच हजार रुपये दलालों को देकर इन आतंकियों को सीमा पार करवाया गया था ।
इसमें सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के जवानों की भी मिलीभगत सामने आई है । बशीरहाट के रास्ते आतंकियों के सीमा पार होने की जानकारी मिलने के बाद बीएसएफ की खुफिया टीम भी जांच में जुट गई है । लालबाजार पुलिस मुख्यालय पहुंचकर गिरफ्तार किए गए आतंकियों, विशेषकर शहादत हुसैन से पूछताछ की गई । सीमा पार करवाने वाले दलालों की पहचान कर उनकी धरपकड़ की तैयारी की जा रही है ।
कई और आतंकियों के सीमा पार करने की जानकारी सामने आई
शहादत ने पूछताछ में बताया कि, उसने गाछाग्राम के इस कॉरीडोर से और भी कई आतंकियों को सीमा पार करवाया है । इनमें नयन, सजल और उमर फारुख के अलावा भी कुछ आतंकियों के पश्चिम बंगाल में घुसने की आशंका जताई जा रही है ।
अलकायदा के तीनों आतंकियों से पूछताछ में पता चला है कि, शमशाद व रियाज तीन फरार चल रहे आतंकियों नयन, सजल और फारुख के साथ हावड़ा स्टेशन के ठीक पास स्थित शिवम होटल में ठहरे थे । उक्त होटल में छापामारी व जांच के बाद ही एसटीएफ को होटल के रजिस्टर से उमर फारुख के बारे में जानकारी मिली । हावड़ा के इस होटल से एसटीएफ को अलकायदा के तीसरे फरार आतंकी उमर फारुख उर्फ माही के बारे में जानकारी मिली है । उसके पास पश्चिम बंगाल का आधार कार्ड है । उसने मोहम्मद अफताब खान के नाम से आधार कार्ड बनवा रखा है । उसी के आधार पर वह भी शिवम होटल में ठहरा था ।
यह घटना से कुछ सूत्र ध्यान में आते है . . .
१. आज बांग्लादेशी घुसपैठिए बडे आराम में भारत की सीमा में प्रवेश कर रहे है । एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी सीमा काफी लंबी है इसलिए हर जगह सैनिकों की गश्त संभव नही है । इसलिए घुसपैठियों को आराम से भारत में प्रवेश करना संभव होता है । सरकार ने इसकी आेर गंभीरता से ध्यान देकर यह घुसपैठ रोकने के लिए प्रयास करने चाहिए, नहीं तो यही बांग्लादेशी आगे जाकर भारत में आतंकी गतीविधीयों को अंजाम देने में कोर्इ कसर नहीं छोडेंगे ।
२. दुसरा मुद्दा ये है कि, केवल पैसों के लिए आतंकियों को देश में घुसने के लिए सहायता करनेवाले देशद्रोहीयों की भी गंभीरता से जांच होनी आवश्यक है । अधिकतर घुसपैठियों के पास नकली दस्तावेज़ मिल चुके है । इन्हे यह दस्तावेज़ उपलब्ध करवा देनेवाले भ्रष्ट अधिकारी भी भारत की सुरक्षा में सेंध लगा रहे है । एेसे अधिकारीयों को खोजकर उन्हें बन्दी बनाकर उनपर देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए । केन्द्र सरकार ने एेसा गुनाह करनेवालों को कठोर से कठोर दंड देना चाहिए, जिससे कोर्इ भी आगे भ्रष्टाचार करने की हिम्मत न कर सकें ।
दो संदिग्ध बांग्लादेशी आतंकी और उनका भारतीय साथी (मध्य में) गिरफ्तार
कोलकाता : बांग्लादेश के एक प्रतिबंधित आतंकी संघटन ‘अंसार बांग्ला’ के दो संदिग्ध सदस्यों और उनके एक भारतीय साथी को मंगलवार को शहर पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने कोलकाता रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया । एसटीएफ के उपायुक्त मुरलीधर शर्मा ने बताया कि, बांग्लादेश के सिलहट के रहनेवाले शमशाद मियां उर्फ तनवीर सैफुल उर्फ तुषार विश्वास और खुलना के रहनेवाले रिजाउल इस्लाम उर्फ रियाज डेढ़ साल पहले भारत में घुस आये थे । शमशाद इंजीनियर है और उसके पास तुषार विश्वास नाम का पैन कार्ड मिला । उनके पास से पचास आधार कार्ड और हाथ से लिखी पर्चियां मिली हैं जिनमें शहर के धर्मातला और पार्क स्ट्रीट जैसे इलाकों के नाम हैं ।
एसटीएफ के उपायुक्त ने कहा कि, रासायनिक पदार्थों की कुछ जानीमानी दुकानों के विजिटिंग कार्ड भी जब्त किए गए । पुलिस को संदेह है कि, उन्होंने बम बनाने के लिए इन दुकानों से रासायनिक पदार्थ खरीदे । उन्होंने कहा कि, उनके भारतीय साथी की पहचान मनोतोष डे उर्फ मोना के रूप में की गयी है जो पश्चिम बंगाल के उत्तरी २४ परगना जिले के बसीरहाट का निवासी है । वह कथित शस्त्र विक्रेता है । शमशाद मियां और रिजाउल इस्लाम का हाथ बांग्लादेश में १७ ब्लॉगरों की हत्या में होने का संदेह है ।
यह घटना से कुछ सूत्र ध्यान में आते है . . .
१. आज बांग्लादेशी घुसपैठिए बडे आराम में भारत की सीमा में प्रवेश कर रहे है । एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी सीमा काफी लंबी है इसलिए हर जगह सैनिकों की गश्त संभव नही है । इसलिए घुसपैठियों को आराम से भारत में प्रवेश करना संभव होता है । सरकार ने इसकी आेर गंभीरता से ध्यान देकर यह घुसपैठ रोकने के लिए प्रयास करने चाहिए, नहीं तो यही बांग्लादेशी आगे जाकर भारत में आतंकी गतीविधीयों को अंजाम देने में कोर्इ कसर नहीं छोडेंगे ।
२. दुसरा मुद्दा ये है कि, केवल पैसों के लिए आतंकियों को आधारकार्ड, पॅन कार्ड जैसे महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ उपलब्ध कैसे होते है ? इसकी भी गंभीरता से जांच होनी आवश्यक है । अधिकतर घुसपैठियों के पास नकली दस्तावेज़ मिल चुके है । इन्हे यह दस्तावेज़ उपलब्ध करवा देनेवाले भ्रष्ट अधिकारी ही भारत की सुरक्षा में सेंध लगा रहे है । एेसे अधिकारीयों को खोजकर उन्हें बन्दी बनाकर उनपर देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए । केन्द्र सरकार ने एेसा गुनाह करनेवालों को कठोर से कठोर दंड देना चाहिए, जिससे कोर्इ भी आगे भ्रष्टाचार करने की हिम्मत न कर सकें ।
उत्तर प्रदेश के देवबंद में पिछले दिनों आतंकी कनेक्शन के बाद सहारनपुर पुलिस अब सतर्क होकर कदम रख रही है। पुलिस ने अब देवबंद क्षेत्र के सभी लोगों के पासपोर्ट को फिर से चेक करवाने का निर्णय लिया है जिसके लिए एसएसपी ने LIU और स्थानीय पुलिस को आदेश जारी किया है।
स्थानीय एसएसपी का कहना है कि, हाल में देवबंद में बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकी संघठन के कई सक्रिय सदस्यों को देवबंद व उसके आस-पास से गिरफ्तार किया था। आतंकियों के पास से फर्जी पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज मिले थे जिसको देखते हुए आदेश दिए गए हैं ।
सहारनपुर पुलिस को ATS की इस कार्यवाही की भनक तक नहीं लगी थी। देवबंद में आतंकी का मिलना सहारनपुर पुलिस के ख़ुफ़िया विभाग की बड़ी निष्क्रियता थी, इस मामले में पुलिस की बड़ी फजीहत भी हुई थी।
यह घटना से कुछ सूत्र ध्यान में आते है…
१. केवल पैसों के लिए आतंकियों को फर्जी पासपोर्ट उपलब्ध करवा देनेवाले भ्रष्ट अधिकारी ही भारत की सुरक्षा में सेंध लगा रहे है । एेसे अधिकारीयों को खोजकर उन्हें बन्दी बनाकर उनपर देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए । केन्द्र सरकार ने एेसा गुनाह करनेवालों को कठोर से कठोर दंड देना चाहिए, जिससे कोर्इ भी आगे भ्रष्टाचार करने की हिम्मत न कर सकें ।
२. दुसरा मुद्दा ये है कि, आज बांग्लादेशी घुसपैठिए बडे आराम में भारत की सीमा में प्रवेश कर रहे है । एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी सीमा काफी लंबी है इसलिए हर जगह सैनिकों की गश्त संभव नही है । इसलिए घुसपैठियों को आराम से भारत में प्रवेश करना संभव होता है । सरकार ने इसकी आेर गंभीरता से ध्यान देकर यह घुसपैठ रोकने के लिए प्रयास करने चाहिए, नहीं तो यही बांग्लादेशी आगे जाकर भारत में आतंकी गतीविधीयों को अंजाम देने में कोर्इ कसर नहीं छोडेंगे ।
आप क्या कर सकते है ?
१. फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करनेवाले एेसे भ्रष्ट अधिकारीयोंपर कठोर कारवार्इ करने की केन्द्र सरकार से मांग करें । इसके लिए ज्ञापन प्रस्तुती कर सकते है ।
२. यदि आप के क्षेत्र में इस प्रकार से कोर्इ अधिकारी फर्जी दस्तावेज बनाता ध्यान में आए, तो तुरंत उसकी सूचना पुलिस को दें । यदि फिर भी कुछ कारवार्इ नही होती, तो हमें contact@hindujagruti.org इस र्इमेल पतेपर भेजे ।
३. अाप के क्षेत्र में यदि कोर्इ व्यक्ती संदिग्ध तरीके रहता नजर आए तो उसकी सूचना पुलिस को दें।