Saturday, 4 August 2018

भारत को पडोसी देशों के मुस्लिमों की आवश्यकता नहीं पर यहां के नेताओं को है’ – तसलीमा नसरीन


निर्वासन में रह रहीं बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को ‘‘अवैध प्रवासी’’ करार नहीं दिया जाना चाहिए। असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) ड्राफ्ट से ४० लाख लोगों का नाम बाहर होने की पृष्ठभूमि में उनका यह बयान आया है।
नसरीन ने बुधवार को ट्विटर पर लिखा, ‘‘शुरूआती मानव बेहतर जिंदगी के लिए अफ्रीका से एशिया आए। इसके बाद मानव आगे बढता रहा। हमारे पूर्वज मानव अवैध नहीं थे।’’
लेखिका ने ट्वीट किया, ‘‘किसी भी व्यक्ति को अवैध प्रवासी करार नहीं दिया जाना चाहिए। अवैध रूप से भारत घुसने वाले बांग्लादेशी नागरिक, उनका कृत्य भारतीय कानून के अनुसार अवैध है लेकिन वे ‘अवैध’ नहीं हैं।’’
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का संदर्भ दिया कि आर्थिक कारणों से आए बांग्लादेशी प्रवासी भारत से अपने वतन लौट सकते हैं क्योंकि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पहले से बहुत बेहतर हुई है।
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘‘भारत में काफी मुसलमान हैं। भारत को पडोसी देशों से और मुसलमानों की आवश्यकता नहीं है। परंतु दिक्कत है कि भारतीय नेताओं को उनकी आवश्यकता है।’’
स्त्रोत : न्यूज १८

Friday, 3 August 2018

ଓଡିଶା ମୁହାଁ ବଙ୍ଗଳାଦେଶୀ


ଭୁବନେଶ୍ୱର, ୩/୮ ନ୍ୟାସନାଲ ରେଜିଷ୍ଟାର ଅଫ ସିଟିଜେନ (ଏନଆରସି) ପକ୍ଷରୁ ଜାରି ହୋଇଥିବା ଚୂଡାନ୍ତ ଡ୍ରାଫ୍ଟ ଅନୁଯାୟୀ ଆସାମରେ ୨ କୋଟି ୮୯ଲକ୍ଷ ୮୩ ହଜାର ୬୭୭ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କୁ ନାଗରିକତ୍ୱ ମିଳିଥିବାବେଳେ ୪୦ଲକ୍ଷ ନାଗରିକଙ୍କୁ ଅବୈଧ ଦର୍ଶାଯାଇଛି । ଆସାମରେ ନାଗରିକତ୍ୱ ପାଇଁ ୩ କୋଟି ୨୯ ଲକ୍ଷ ୯୧ ହଜାର ୩୮୪ ଜଣ ଆବେଦନ କରିଥିଲେ । ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ୪୦ଲକ୍ଷ ୭ ହଜାର ୭୦୭ ଜଣଙ୍କ ନାଗରିକତ୍ୱ ବାତିଲ ହୋଇଥିବାବେଳେ ଅବଶିଷ୍ଟଙ୍କୁ ନାଗରିକତ୍ୱର ମାନ୍ୟତା ମିଳିଛି । ବାତିଲ ହୋଇଥିବା ବ୍ୟକ୍ତି ବିଶେଷଙ୍କ ପାଖରେ ପର୍ଯ୍ୟାପ୍ତ ଦସ୍ତାବିଜ ନାହିଁ ଓ ସେମାନେ ନାଗରିକତ୍ୱ ପ୍ରମାଣିତ କରିବାରେ ବିଫଳ ହେବାରୁ ଏଭଳି ପଦକ୍ଷେପ ଗ୍ରହଣ କରାଯାଇଛି । ଏମାନେ ମୁଖ୍ୟତଃ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀ । ଏହି ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ମାନେ ଏବେ ଓଡିଶା ମୁହାଁ । ସମୁଦ୍ର ଓ ଟ୍ରେନ ଯୋଗେ ସେମାନେ ଓଡିଶା ଆସୁଥିବା ଗୁଇନ୍ଦା ସୂଚନା ମିଳିବା ପରେ ତଟରକ୍ଷୀ ଏଡିଜି ପ୍ରାଣବିନ୍ଦୁ ଆଚାର୍ଯ୍ୟ ଉପକୂଳବର୍ତ୍ତୀ ସବୁ ଜିଲ୍ଲାର ଜିଲ୍ଲାପାଳମାନଙ୍କୁ ସତର୍କ କରିବା ସହ ସମୁଦ୍ରରେ ପାଟ୍ରୋଲିଂ ଜୋର କରିବାକୁ କହିଛନ୍ତି । ବିଶେଷକରି ରାଜ୍ୟର ସମୁଦ୍ର ତଟୀୟ ଅଞ୍ଚଳ କେନ୍ଦ୍ରାପଡ଼ା, ଜଗତସିଂହପୁର, ଚାନ୍ଦିପୁର, ଭଦ୍ରକ, ଧାମରା, ପାରାଦ୍ୱୀପ ଇତ୍ୟାଦି ସ୍ଥାନରେ ହାଇଆଲର୍ଟ ଜାରି କରାଯାଇଛି । ୭୬୦୦ କିଲୋମିଟର ଭାରତୀୟ ସମୁଦ୍ର ତଟୀୟ ଉପକୂଳ ମଧ୍ୟରୁ ଓଡ଼ିଶା ଉପକୂଳରେ ପ୍ରାୟ ୪୮୦ କିଲୋମିଟର ସାମୁଦ୍ରିକ ବେଳାଭୂଇଁ ଦକ୍ଷିଣରେ ଗୋପାଳପୁରଠାରୁ ପୂର୍ବରେ ଦୀଘା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବ୍ୟାପୀ ରହିଛି । ଉପକୂଳବର୍ତ୍ତୀ ସନ୍ତ୍ରାସବାଦୀ ଆକ୍ରମଣ ଓ ଅନୁପ୍ରବେଶ ମୁକାବିଲା ପାଇଁ ୨୦୦୫ ମସିହା ଜେନେରାଲ ସିକ୍ୟୁରିଟି ସ୍କିମ୍‍ ଅନୁଯାୟୀ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଏକ ଅତ୍ୟାଧୁନିକ ତ୍ୱରିତ ସାମୁଦ୍ରିକ ପୁଲିସବାହିନୀ ଓ ତଟରକ୍ଷୀ ପୁଲିସ ଥାନାମାନ ସ୍ଥାପନ କରିବାର ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇଥିଲେ । ରାଜ୍ୟର ୪୮୦ କିମି ବ୍ୟାପ୍ତ ଉପକୂଳରେ ପାଟ୍ରୋଲିଂ ପାଇଁ ୧୮ଟି ବୋଟ ମଧ୍ୟ ରହିଛି । ସେଗୁଡିକ ନିଷ୍କ୍ରୀୟ ପ୍ରାୟ । କିଛି ବର୍ଷ ତଳେ ଉପକୂଳ ଥାନାଗୁଡ଼ିକୁ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ୧୮ଟି ଯନ୍ତ୍ରଚାଳିତ ଡ଼ଙ୍ଗା ଯୋଗାଇ ଦେଇଥିଲେ  । ମାତ୍ର ଏହି ଯନ୍ତ୍ରଚାଳିତ ଡ଼ଙ୍ଗାଗୁଡ଼ିକ କେବଳ ଗଭୀର ଜଳରେ ଚଳନକ୍ଷମ  । ଅଗଭୀର ଅଞ୍ଚଳରେ ଏହା ଚଳାଚଳ ସକ୍ଷମ ହେଉନାହିଁ । ତେଣୁ ଉଭୟ ଗଭୀର ଓ ଅଗଭୀର ଜଳରେ ଚଳାଚଳ କରି ପାରୁଥିବା ଡ଼ଙ୍ଗା ଯୋଗାଇ ଦେବାକୁ ରାଜ୍ୟ ସରକାର ଅନୁରୋଧ କରି ଚୁପ ହୋଇ ବସିଯାଇଥିଲେ । ଏହାର ସୂଯୋଗ ନେଇ ମତ୍ସ୍ୟଜୀବୀର ଛଦ୍ମବେଶରେ ଛୋଟ ଟ୍ରଲର ଓ ହୁଲି ଡଙ୍ଗା ସାହାଯ୍ୟରେ ବାଂଲାଦେଶୀ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀଗଣ ଓଡ଼ିଶାର ଉପକୂଳ ଅଞ୍ଚଳମାନଙ୍କରେ ପର୍ଯ୍ୟାପ୍ତ ସଂଖ୍ୟାରେ ଅକ୍ଳେଶରେ ପ୍ରବେଶକରି ପର୍ଯ୍ୟାୟକ୍ରମେ ଏହାର ମାଳ ଅଞ୍ଚଳମାନଙ୍କୁ ମାଡିଗଲେଣି । ଏବେ ଆସାମରୁ ହଜାର ହଜାର ସଂଖ୍ୟକ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଓଡିଶାକୁ ପଶିଆସିବାକୁ ଉଦ୍ରମ କରୁଛନ୍ତି । ଅନୁପ୍ରବେଶକୁ ରୋକିବାପାଇଁ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ନିର୍ଦେଶାନୁଯାୟୀ ଓଡ଼ିଶା ସରକାର ଏହାର ବ୍ୟାପକ ଉପକୂଳ ଅଞ୍ଚଳ, ବିଶେଷତଃ ବାଲେଶ୍ୱର, ଯାଜପୁର, କେନ୍ଦ୍ରାପଡ଼ା, କଟକ ଓ ଦକ୍ଷିଣ ଓଡ଼ିଶାର ମାଲକାନଗିରି, ନବରଙ୍ଗପୁର ଓ କୋରାପୁଟ ପ୍ରଭୃତି ଅଞ୍ଚଳରେ ଜବରଦଖଲକାରୀ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀମାନଙ୍କୁଚିହ୍ନଟ କରିବା ପ୍ରକ୍ରିୟା ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲେ । ପ୍ରଥମ ପର୍ଯ୍ୟାୟରେ ଓଡ଼ିଶାର କେନ୍ଦ୍ରାପଡ଼ା ଜିଲାର ୧୫୫୧ ଜଣ ବାଂଲାଦେଶୀ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀଙ୍କୁ ଚିହ୍ନଟକରି ଦେଶ ତ୍ୟାଗ କରିବାକୁ ନୋଟିସ ଦେବାମାତ୍ରେ ସେମାନଙ୍କ ଭୋଟରେ ଅତୀତରେ ଉପକୃତ ହୋଇଥିବା ଅଥବା ଭବିଷ୍ୟତରେ ଭୋଟ ପାଇବା ଆଶା ରଖି କେତେକ ଦୁର୍ନୀତିଗ୍ରସ୍ତ ରାଜନୈତିକ ଭୋଟ ବେପାରୀ ଏହି ଦେଶାନ୍ତର ନୋଟିସକୁ ରାଜନୈତିକ ରଙ୍ଗ ଦେଇ, ଏମାନଙ୍କ ତରଫରୁ ତତକାଳୀନ ୟୁପିଏ ନେତୃତ୍ୱାଧୀନ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ନିକଟରେ ଓକିଲାତି କରିବାପାଇଁ ପରସ୍ପର ମଧ୍ୟରେ ପ୍ରତିଯୋଗିତା ଆରମ୍ଭ କରିଦେଇଥିଲେ । ଫଳ ସ୍ୱରୂପ ଏବେ ଓଡିଶଶରେ ୨୦ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ରହୁଥିବା ବିଶ୍ୱସ୍ତ ସୂତ୍ରରୁ ଜଣାପଡିଛି । କେବଳ ବାଷଲଶ୍ୱରରେ ୪ଲକ୍ଷ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ରହୁଛନ୍ତି । ଏବେ ରାଜ୍ୟର ଆଦିବାସୀବହୁଳ ଜିଲା ସୁନ୍ଦରଗଡ଼, ଝାରସୁଗୁଡ଼ା, କଳାହାଣ୍ଡି, ସମ୍ବଲପୁର, କୋରାପୁଟ, ମାଲକାନଗିରି ଆଦିକୁ ମଧ୍ୟ ବାଂଲାଦେଶୀମାନେ ପଶିଯାଇ ଯେନତେନ ପ୍ରକାରେ ନିଜର ପରିଚୟପତ୍ର ହାସଲ କରି ରହୁଛନ୍ତି । ଏଥିରେ ସ୍ଥାନୀୟ ନେତା ଓ ସରକାରୀ କର୍ମଚାରୀ ସେମାନଙ୍କୁ ସହାୟତା ଦେଉଛନ୍ତି । ଏଭଳି ସମୟରେ ଆସାମରୁ ଆସୁଥିବା ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଓଡିଶାରେ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ଘଟାଇବେ ବୋଲି ଆଶଙ୍କା କରାଯାଉଛି

असम एनआरसी : तस्लीमा ने ममता से पूछा, ‘मुझे जब बंगाल से बाहर किया गया तब आप कहां थी ?’


नई देहली : असम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर सडक से लेकर संसद तक हंगामा बरपा है ! सत्तापक्ष जिन ४० लाख लोगों का नाम एनआरसी में नहीं है उन्हें नागरिकता साबित करने के लिए मौका देने की बात कही है। वहीं विपक्ष का कहना है कि, सरकार का इरादा ठीक नहीं है, अपने ही घर में इतने लोगों को बेघर किया जा रहा है। इस बीच बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कहा है कि घुसपैठिए अवैध नहीं होते हैं।
तस्लीमा ने राजनेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, ”भारत में काफी मुस्लिम हैं। भारत को पडोसी देशों से और मुस्लिमों की आवश्यकता नहीं है। परंतु समस्या यह है कि भारतीय राजनेताओं को इनकी आवश्यकता है !”
भारत में निर्वासित तस्लीमा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कठघरे में खडा करते हुए कहा, ”यह देखकर अच्‍छा लगा कि ममता जी ४० लाख बांग्‍ला बोलनेवालों के लिए इतनी ज्‍यादा सहानुभूति रखती हैं। उन्‍होंने यहां तक कह दिया है कि वह असम बाहर किए जानेवाले लोगों को वह शरण देंगी। उनकी यह सहानुभूति तब कहां थी जब उनकी विरोधी पार्टी ने मुझे पश्चिम बंगाल से बाहर कर दिया था ?”
तस्लीमा ने कहा, ”ममता जी के अंदर सभी बेघर बांग्‍ला बोलनेवालों के लिए के सहानुभूति नहीं है। यदि उनके अंदर होता तो उनके अंदर मेरे लिए भी होती और उन्‍होंने मुझे भी पश्चिम बंगाल में आने की अनुमति दी होती !”
आपको बता दें तस्लीमा किताबों को लेकर विवादों में रही हैं। मुस्लिम संगठनों ने बांग्लादेश में तस्लीमा का विरोध किया था। जिसके बाद वो भारत आ गई और पश्चिम बंगाल में शरण ली। परंतु साल २००७ में उनके लेखन को लेकर कोलकाता में हिंसक प्रदर्शन हुआ। तब की लेफ्ट सरकार ने उन्हें राज्य से बाहर जाने के लिए कहा। अब तस्लीमा ने इसी बहाने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है !
स्त्रोत : एबीपी न्यूज

Thursday, 2 August 2018

अमित शाह ने कहा, ‘विपक्ष फैला रहा भ्रम, घुसपैठियों पर रुख साफ करे कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस’


नई देहली : असम में नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) के फाइनल ड्राफ्ट को लेकर मंगलवार को संसद में हुए हंगामे के बाद भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोला। प्रेस वार्ता के दौरान शाह ने कहा कि एनआरसी से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, प्राथमिक जांच में पाया गया कि वे भारतीय नहीं बल्कि घुसपैठिए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष कई तरह के भ्रम फैला रहा है जबकि वास्तविकता अलग है। इससे पहले शाह के बयान पर राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने जबर्दस्त हंगामा किया था, जिससे सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पडी।

‘साबित नहीं कर पाए भारतीय नागरिक’

शाह ने कहा कि जो लोग साबित नहीं कर पाए कि वे भारतीय नागरिक हैं, उनके नाम को ही ड्राफ्ट से अलग किया गया है। उन्होंने कहा, ‘सदन में मैंने सभी पार्टियों के लोगों को सुना पर किसी भी पार्टी ने स्पष्ट नहीं किया कि यह अंतिम सूची नहीं है। किसी ने यह नहीं कहा कि एनआरसी कहां से आया। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐसा कहा जा रहा है कि भाजपा जनता के साथ धोखा कर रही है।’

कांग्रेस पर सीधा अटैक

उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि घुसपैठ के कारण असम के विद्यार्थियों ने आंदोलन किया था। कई लोगों की जान चली गई और फिर १४ अगस्त १९८५ को असम अकॉर्ड साइन किया गया। उस समय देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। अकॉर्ड के अनुसार यह तय किया गया कि एनआरसी बनाते समय एक-एक घुसपैठिए को चुनकर बाहर किया जाएगा।

शाह का आरोप – कांग्रेस के लिए वोट बैंक अहम

उन्होंने कहा, ‘२००५ में भी कांग्रेस ने एनआरसी बनाने का प्रयास किया पर उनके लिए वोट बैंक महत्वपूर्ण था। उनमें साहस नहीं था। इसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा और फिर मोदी सरकार ने एनआरसी बनाने का काम शुरू किया।’

मानवाधिकार पर भी दिया जवाब

विपक्ष पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा कि असम के लोगों के रोजगार छिने जा रहे हैं, स्वास्थ्य और शिक्षा के अवसर छिने जा रहे हैं; क्या उनका मानवाधिकार नहीं है ? उन्होंने कहा कि भारत के लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ही एनआरसी बना। उन्होंने मांग की कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस को अपना रुख साफ करना चाहिए। मौजूदा सरकार के लिए सीमाओं और देशवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राज्यों के बीच विवाद पर कहा, विपक्ष की चाल

शाह ने कहा कि इस मसले पर सभी पार्टियों को देश की जनता के समक्ष अपना रुख साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पर निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई गई है और सब कुछ उच्चतम न्यायालय की निगरानी में किया गया है। शाह ने कहा कि भारत के दूसरे राज्यों से आए किसी भी लोगों के नाम काटे नहीं गए हैं और न काटे जा सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘जो मैं संसद में नहीं कह सका, अब कह रहा हूं। भ्रांति फैलाई जा रही है कि राज्य-राज्य में विवाद होगा, यह विपक्ष की चाल है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं। ऐसा कर कांग्रेस ने जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है।’

‘राहुल गांधी साफ करें रुख’

उन्होंने कहा, ‘१९७१ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि एक भी घुसपैठिए के लिए देश में कोई जगह नहीं है। तत्कालीन गृह मंत्री चिदंबरम ने भी कहा था कि घुसपैठियों के लिए देश में जगह नहीं है। ऐसे में अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना रुख साफ करना चाहिए।’ अमित शाह ने वोट बैंक की राजनीति करने के आरोपों पर कहा, ‘हम जब विपक्ष में थे तब भी और आज सत्ता में हैं, तब भी हमारा रुख बिल्कुल साफ है।’ उन्होंने कहा कि शरणार्थी और घुसपैठिए दोनों का अलग मसला है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘ममता बनर्जी चुनाव जीतने के लिए भ्रांति फैला रही हैं। ममता कह रही हैं कि गृह युद्ध होगा, वे क्या समझाना चाहती हैं ? बांग्लादेशी घुसपैठियों के मसले पर ममता को अपना रुख साफ करना चाहिए। इस देश के मानवाधिकारों की भी कोई बात करेगा कि नहीं ? ऐसे देश की सुरक्षा और देश के लोगों की रक्षा कैसे कर सकेंगे ? उन्होंने साफ कहा कि एनआरसी देश की सुरक्षा के लिए हैं और उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत इसे लागू किया जाएगा।
स्त्रोत : नवभारत टाईम्स

Wednesday, 1 August 2018

ଓଡ଼ିଶାରେ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀ


ସୁଦୀର୍ଘ ବେଳାଭୂମି ଓ ସାମୁଦ୍ରିକ ତଟ ଅଞ୍ଚଳକୁ ନେଇ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱରେ ଗୌରବର ବାନା ଉଡାଉଥିବା ଓଡ଼ିଶା ପାଇଁ ଏହି ପ୍ରାକୃତି ସମ୍ପଦ ଏବେ କାଳ ହେବାକୁ ଯାଉଛି । ଓଡ଼ିଶାର ଦୀର୍ଘ ବେଳାଭୂମି ସହ ଘଞ୍ଚ ଜଙ୍ଗଲ ବାତ୍ୟା ଓ ସୁନାମୀକୁ ମୁକାବିଲା କରୁଥିବାବେଳେ କିନ୍ତୁ ପରବର୍ତ୍ତୀ ସମୟରେ ଏହି ବେଳାଭୂମିର ଅଧିକାଂଶ ଜଙ୍ଗଲ ମାଫିଆଙ୍କ ହାତରେ ପଡ଼ି ଚାଷ ଜମିରେ ପରିଣତ ହେଲା । ସେହିପରି ବାଲେଶ୍ୱରରୁ କେନ୍ଦ୍ରାପଡ଼ାର ରାଜନଗର ଓ ପାରାଦ୍ୱୀପକୁ ଛୁଇଁଥିବା ସମୁଦ୍ରତଟ ଏବେ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀଙ୍କ ଚରାଭୂମି ପାଲଟିଛି । ବାଙ୍ଗଲାଦେଶରେ ବେରୋଜଗାରୀ ଓ ଥଇଥାନ ମୁଖ୍ୟ ପ୍ରସଙ୍ଗ ହୋଇଥିବାରୁ ଓଡ଼ିଶାର ଖୋଲାମେଲା ସମୁଦ୍ରତଟ ଏହି ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀଙ୍କ ଜୀବନ ଜୀବିକାର କେନ୍ଦ୍ର ପାଲଟିଛି । ବିଭାଜନ ପୂର୍ବରୁ ପୂର୍ବବଙ୍ଗ ତଥା ପଶ୍ଚିମବଙ୍ଗ ଭିତରେ ସୀମାବର୍ତ୍ତୀ କୌଣସି ନିୟନ୍ତ୍ରଣ ବା କଟକଣା ନଥିବାରୁ କିଛି ଦିନ ଏହା ରୟାଲ ବେଙ୍ଗଲ ଟାଇଗରର କ୍ଷେତ୍ରସ୍ଥଳୀ ପାଲଟିଥିଲା । ମାଛଧରା ଜୀବିକା କେବଳ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ନୁହେଁ ତଟବର୍ତ୍ତୀ ଓଡ଼ିଆଙ୍କ ଜୀବନ ଜୀବିକା ଥିଲା । ତେବେ ଏହି ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀ ଯେ ବିନା ସରକାରୀ ଓ ସ୍ଥାନୀୟ ପ୍ରୋତ୍ସାହନରେ ସେମାନଙ୍କ ପ୍ରଭାବ ବିସ୍ତାର କରିଛନ୍ତି ତାହାନୁହେଁ । ସେମାନେ ନିଜର ଜୀବିକା ସହ ଜଡ଼ିତ ଥିବା ଓଡ଼ିଶା ମତ୍ସ୍ୟଜୀବୀ ମାନଙ୍କ ସହ ସୁସମ୍ପର୍କ, ସ୍ଥଳବିଶେଷରେ ପାରିବାରିକ ସମ୍ପର୍କ ରଖି ସ୍ଥାନୀୟ ଗାଁ ମୁଖିଆ, ବନକର୍ମଚାରୀ, ତଟବନରକ୍ଷୀ ଓ ପୁଲିସକୁ ସନ୍ତୁଷ୍ଟ କରି ନିଜ ଯୋଜନାକୁ ସଫଳ କରିବାକୁ ସକ୍ଷମ ହୋଇଛନ୍ତି । କେବଳ ମାଛଧରି ନୁହେଁ ଜଙ୍ଗଲରୁ ବିଭିନ୍ନ ଜଙ୍ଗଲୀ ପଶୁ ହରିଣ, ବରାହ ମାରି ମାଂସ ଓ ଚମଡ଼ାର ଚୋରା ବ୍ୟାପର କରୁଛନ୍ତି । ଓଡ଼ିଶାର ତଟଦେଶରେ ଥିବା ଓଡ଼ିଆମାନେ ୧୯୬୭, ୧୯୭୨ ଓ ପରେ ୧୯୯୯ର ମହାବାତ୍ୟାକୁ ସାମ୍ନା କରିଛନ୍ତି । ଇତିହାସର ପୃଷ୍ଠା ଦେଖିଲେ ଜଣାଯାଏ ପୂର୍ବବଙ୍ଗରେ ମୁସିଲିମ୍ ଲିଗ୍ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଥିବାବେଳେ ସେ ସମୟରେ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ହିନ୍ଦୁମାନଙ୍କ ଉପରେ ଦମନ ଲୀଳା କରିବାକୁ ସେମାନଙ୍କ ନେତା ସୁରାବର୍ଦ୍ଦି ପ୍ରବର୍ତ୍ତାଇଥିଲେ । ସେଠାରେ ଅସଂଖ୍ୟ ହିନ୍ଦୁ ମାନଙ୍କୁ ହତ୍ୟା କରାଯିବା ସହ ସେମାନଙ୍କ ସମ୍ପତିବାଡ଼ିକୁ ଧୂଳିସାତ୍ କରି ମହିଳା ଓ ଯୁବତୀମାନଙ୍କୁ ବଳାକ୍ରାର କରାଗଲା ଯାହାଦ୍ୱାରା ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ହିନ୍ଦୁ ସମୁଦ୍ର ପଥ ଦେଇ ଭାରତକୁ ପଳାୟନ କରିଥିଲେ । ଯେଉଁମାନେ କି ହିନ୍ଦୁ ହୋଇ ମଧ୍ୟ ଶରଣାର୍ଥୀର ସ୍ଥାନ ପାଇଲେ । ତେବେ ୧୯୭୧ ବଙ୍ଗଳାଦେଶର ଜାତୀୟ ମୁକ୍ତି ସଂଗ୍ରାମ ବେଳେ ପାକିସ୍ଥାନର ସୈନ୍ୟ ମାନଙ୍କ ହିନ୍ଦୁମାନଙ୍କ ଉପରେ ଅକଥନୀୟ ଅତ୍ୟାଚାର ପରେ ପୁନର୍ବାର ଶରଣାର୍ଥୀଙ୍କ ସୁଅ ଛୁଟିଲା । ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ, ଆସାମ, ଉତ୍ତରପୂର୍ବାଞ୍ଚଳ ରାଜ୍ୟ ଓ ବିହାରରେ ଶରଣାର୍ଥୀଙ୍କୁ ଯେଉଁ ବିପୁଳ ସ୍ରୋତ ସୃଷ୍ଟି ହେଲା ତାହା କେତେକାଂଶରେ ଧର୍ମଭିତ୍ତିକ ହୋଇ ଭିନ୍ନ ଏକ ଶ୍ରେଣୀ ସଂଗ୍ରାମର ଲଢ଼େଇ ସୃଷ୍ଟି କଲା । ନୂଆ ବଙ୍ଗଳା ଦେଶ ସୃଷ୍ଟି ହେବାପରେ ଦେଶର ସାମର୍ଥ୍ୟ ନଥିବାରୁ ଅନେକ ନାଗରିକ ବିଭିନ୍ନ ଦେଶକୁ ଛୋଟ ମୋଟର କାମଦାମ ପାଇଁ ଦେଶାନ୍ତର ହେଲେ । ଆଜି ବି ଖୁବ୍ ମଜୁରୀରେ ଭଲ କଳା ନିର୍ମାଣରେ ସିଦ୍ଧହସ୍ତ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ରାଜମିସ୍ତ୍ରୀ, ବଢ଼େଇ, ରଙ୍ଗମିସ୍ତ୍ରୀ ଓ ଗାଡ଼ି କାରିଗରଙ୍କ ଚାହିଦା କେବଳ ଓଡ଼ିଶାରେ ନୁହେଁ ଭାରତର ବିଭିନ୍ନ ରାଜ୍ୟରେ ରହିଛି । ତେବେ ବିପୁଳ ସଂଖ୍ୟକ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଓଡ଼ିଶା ସରକାରଙ୍କ କଡ଼ା ନଜର ତଳେ ସ୍ଥାନୀୟ ଲୋକଙ୍କ ଓ ପ୍ରଶାସନର ସହଯୋଗ ନେଇ ଦିନକୁ ଦିନ ଓଡ଼ିଶାରେ କାୟା ବିସ୍ତାର କରୁଛନ୍ତି । ତେବେ ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ଅଧିକାଂଶ ଅସାମାଜିକ ତତ୍ତ୍ୱ ଓ ବିଭିନ୍ନ ଆତଙ୍କବାଦୀ ସଂଗଠନ ସହ ଜଡ଼ିତ ରହି ବିଭିନ୍ନ ଚୋରା ଚାଲାଣ ବେଆଇନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ସାମିଲ ହେବା ବର୍ତ୍ତମାନର ସରକାରଙ୍କ ମୁଣ୍ଡବ୍ୟଥାର କାରଣ ପାଲଟିଛି । ସ୍ଥାନୀୟ କୁଜିନେତା ଓ ପ୍ରଶାସନକୁ ହାତ କରି ଭୋଗରାଗ ଦେଇ ସ୍ଥାନୀୟ ଭୋଟର ଭାବେ ସାମିଲ ହୋଇ ସରକାରୀ ଦଳର ବଡ଼ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ ସାଜିଥିବାରୁ ସରକାର ଓ ଦଳ ଅନେକ ସମୟରେ ନୀରବ ରହୁଛନ୍ତି । ଅନେକ ହୁଏତ ଜାଣିନଥିବେ ଆଜି ବି ଓଡ଼ିଶାରେ ବେଆଇନ ଭାବେ ଅନୁପ୍ରବେଶ କରୁଥିବା ଅନେକ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଯେଉଁପରି ଭାବରେ ଖୁବ୍ କମ୍ ସମୟ ଭିତରେ ଭୋଟର କାର୍ଡ଼, ରେସନ କାର୍ଡ଼, ଆଧାର କାର୍ଡ଼, ଜବ କାର୍ଡ଼ ପାଇବା ସହ ଇନ୍ଦିରା ଆବାସ, ମନୋରେଗା ଯୋଜନା ଓ ସରକାରଙ୍କ ସରକାରୀ ବ୍ୟବସ୍ଥିତ ଅଙ୍ଗନବାଡ଼ିର ସୁବିଧା ସୁଯୋଗ ପାଇବା ସହ ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ କିଛି ମଧ୍ୟ ଓଡ଼ିଶାରେ ସରକାରୀ କର୍ମସଂସ୍ଥାନରେ ଯୋଗ ଦେବା ପାଇଁ ସକ୍ଷମ ହୋଇଛନ୍ତି । ଓଡ଼ିଶା ସରକାର ନିଜ ଭୋଟବ୍ୟାଙ୍କକୁ ସୁଦୃଢ଼ କରୁଥିବାରୁ ଏମାନଙ୍କୁ ଆଖିବୁଜା ସମର୍ଥନ ଦେଉଥିବାବେଳେ କେନ୍ଦ୍ରରେ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦିଙ୍କ ନେତୃତ୍ୱାଧୀନ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ସରକାର ଦଳ ଅପେକ୍ଷା ଦେଶର ସୁରକ୍ଷାକୁ ସର୍ବାଧିକ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେଇ କେବଳ ଓଡ଼ିଶାରେ ନୁହେଁ ସମଗ୍ର ଭାରତରେ ବିଭିନ୍ନ ଦେଶର ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀଙ୍କ ଉପରେ କଡ଼ା ନଜର ରଖୁଛନ୍ତି । ଏମାନଙ୍କୁ ନେଇ ଭୋଟବ୍ୟାଙ୍କ ରାଜନୀତି କରୁଥିବା ବିରୋଧୀ ଦଳମାନେ ଏ କ୍ଷେତ୍ରରେ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦିଙ୍କ ସରକାରଙ୍କୁ ନିନ୍ଦା କରିବା ଜାତୀୟତା ବିରୋଧି କହିଲେ ଅତ୍ୟୁକ୍ତି ହେବନାହିଁ । ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱରେ ଭାରତ ଦ୍ରୁତ ପ୍ରଗତି ଓ ଅଭିବୃଦ୍ଧିରେ ନିଜକୁ ଯଥେଷ୍ଟ ଅଗ୍ରଗତିରେ ପହଞ୍ଚାଇ ସାରିଥିବାବେଳେ ଏହିପରି ଅନେକ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀ ଆତଙ୍କବାଦୀ ସାଜି ଦେଶର ଧନଜୀବନ ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ ଭୟଙ୍କର ବିପଦ ସାଜିଛନ୍ତି । ଭାରତରେ ପ୍ରତିଦିନ ଏହି ମାନଙ୍କ କାରଣରୁ ରକ୍ତପାତ ହୋଇ ଆମର ଅତିପ୍ରିୟ ଦେଶ ସେବକ ଯୋଦ୍ଧା ବୀରବାହିନୀ ସୈନିକମାନେ ଓ ପୁଲିସ ଭାଇମାନେ ନିଜ ମୂଲ୍ୟବାନ ଜୀବନକୁ ଦେଶ ମାତୃକାର ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ ବଳୀଦାନ ଦେଉଛନ୍ତି । ଏହି ତଥାକଥିତ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀମାନେ କେବଳ ଓଡ଼ିଶା ନୁହେଁ ଭାରତର ଶକ୍ତି, ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ଲୁଣ୍ଠନ କରିବା ସହ ଯାବତୀୟ ବେଆଇନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରି ଭାରତୀୟ ସ୍ୱାଭିମାନୀ ନାଗରିକଙ୍କ ନିଜ ଅଧିକାର ଓ ହକ୍କୁ ସେମାନେ ଛଡ଼ାଇ ନେଉଛନ୍ତି । ଆସାମର ଘଟଣା ସହ ଉତ୍ତରପୂର୍ବାଞ୍ଚଳ ରାଜ୍ୟରେ ଆଜି ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଭାରତୀୟମାନେ ଏହି ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀ ଆତଙ୍କବାଦୀଙ୍କ ଅତ୍ୟାଚାରର ଶିକାର ହେଉଛନ୍ତି । କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟଙ୍କ ନେତୃତ୍ୱରେ ଜାତୀୟ ନାଗରିକ ପଞ୍ଜିକା କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆସାମରେ କରାଇବା ଦ୍ୱାରା ଚାଳିଶ ଲକ୍ଷରୁ ଉଦ୍ଧ୍ୱର୍ ବେଆଇନ ବାଙ୍ଗଲାଦେଶୀ ଚିହ୍ନଟ ହୋଇପାରିଛନ୍ତି । କିନ୍ତୁ ସମଗ୍ର ଭାରତର ବିଭିନ୍ନ ରାଜ୍ୟରେ ଏମାନେ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ସଂଖ୍ୟାରେ ଥିବା ସମୟରେ ଆଗାମୀ ଦିନରେ ଭାରତୀୟଙ୍କ ପାଇଁ ନିଶ୍ଚିନ୍ତ ଭାବରେ ବିପଦ ବଢ଼ିବାରେ ଲାଗିବ । ଏହି କ୍ରମରେ ଦେଖିଲେ ଶାନ୍ତିପ୍ରିୟ ଓ ଜଗନ୍ନାଥ ଦେଶ ଭାବେ ପରିଚିତ ଓଡ଼ିଶା ମଧ୍ୟ ଯେ ଅଶାନ୍ତ ନ ହେବ ତାହା କହିହେବନାହିଁ । ତେଣୁ ତୁରନ୍ତ ଏହି ବେଆଇନ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀ ଓ ଅସାମାଜିକ ତତ୍ତ୍ୱମାନଙ୍କୁ ସପ୍ରମାଣେ ଧରି ସେମାନଙ୍କୁ ସେମାନଙ୍କ ନିଜ ଦେଶକୁ ପଠାଇବା ଅପରିହାର୍ଯ୍ୟ ।

भारत कोई धर्मशाला नहीं, जहां कोई भी आकर बस जाए ! : सुब्रमण्यम स्वामी


एनआरसी को लेकर राज्यसभा में लगातार हंगामा चल रहा है ! विपक्ष ने एनआरसी को लागू करने के मुद्दे पर अमित शाह के भाषण के दौरान जमकर हंगामा किया। जिस कारण से राज्‍यसभा को बुधवार तक के लिए स्‍थगित करना पडा। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले पर कहा, अगर कोई चटाई लेकर भारत के अंदर आ जाए तो क्या वह भारत का नागरिक हो जाएगा ?
राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, भारत कोई धर्मशाला नहीं है जहां पर कोई भी किसी भी देश से आकर बस जाए। अभी तो असम में एनआरसी लागू हुआ है। अगर हमारी सरकार पश्चिम बंगाल में आएगी तो हम वहां पर भी एनआरसी लागू करेंगे !
सुब्रमण्यम स्वामी ने यह भी कहा कि श्रीलंका से आए हुए तमिल प्रवासियों को भी हटाया जाना चाहिए। मूल बात यह है कि हमारे देश का जब विभाजन हुआ था तब उनको एक अलग देश मिल गया था। मेरा मानना है कि जब उनको अलग देश मिल गया तो वह भारत में घुसपैठिए के तौर पर क्यों, रह रहे हैं ?
जिनके पास नागरिक बनने का अधिकार है, उनको हम नागरिकता दे रहे हैं। जो लोग अवैध नागरिकता लेकर यहां पर रह रहे हैं उनको हम नहीं छोड रहे। मेरा मानना है कि हर प्रांत में इस तरीके से अवैध तौर पर जो लोग रह रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए !
मैं तो यह चाहता हूं कि देश की अस्मिता बचाने के लिए इस तरीके का काम करना चाहिए। मेरा मानना है कि ममता बनर्जी अगर एनआरसी का विरोध कर रही हैं और यह गलती करती हैं तो वहां की जनता उनकी सरकार को उखाड फेंकेगी !
स्त्रोत : आज तक

रोहिंग्याओं की घुसपैठ रोकने के लिए तैनात किए गए बीएसएफ, असम राइफल्स के जवान – गृहमंत्री राजनाथ सिंह


नई देहली : संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को रोहिंग्‍या शरणार्थियों का मुद्दा उठाया गया। लोकसभा में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रोहिंग्या को लेकर राज्यों के लिए एडवाइजरी जारी की है। राजनाथ सिंह ने कहा कि राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे राज्य में रोहिंग्याओं की संख्या आदि के बारे में वे गृह मंत्रालय को इसकी सूचना दें। गृह मंत्रालय ये जानकारी विदेश मंत्रालय को देगा। विदेश मंत्रालय म्यांमार के साथ इनको डिपोर्ट करने पर बातचीत करेगा।

रोहिंग्या के घुसपैठ को रोकने के लिए बीएसएफ और असम राइफल्स तैनात

लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि रोहिंग्या के घुसपैठ को रोकने के लिए बीएसएफ और असम राइफल्स के जवान तैनात किए गए हैं। कोशिश की जा रही है कि भारत में अब और रोहिंग्या घुसपैठ न कर पाएं। भारत में भी ४०,००० रोहिंग्या हैं !

भारत शरणार्थियों को भगाने में यकीन नहीं रखता

सासंद जुगल किशोर शर्मा ने पूछा कि जम्मू से रोहिंग्या कब बाहर होंगे ? इसका जवाब किरन रिजिजू ने दिया। उन्‍होंने कहा, ‘रोहिंग्या भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। सबसे ज्यादा रोहिंग्या जम्मू-कश्मीर में है। इनको सुरक्षित म्यांमार भेजने के लिए प्रयास सरकार कर रही है। राज्य सरकारों के साथ इसपर बातचीत जारी है। भारत शरणार्थियों को भगाने में यकीन नहीं रखता, लेकिन एक रेग्युलेटरी जारी करने में क्या बुराई है। हम विदेश मंत्रालय के माध्यम से रोहिंग्या को सुरक्षित रुप से म्यांमार भेजने के लिए काम कर रहे हैं लेकिन विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। हम पहले अपने देश की सुरक्षा चाहते हैं।

भारत में भी ४०,००० रोहिंग्या

लोकसभा में टीएमसी सांसद सुगत बोस ने सवाल किया कि विदेश मंत्रालय बांग्लादेश में रोहिंग्या के लिए ऑपरेशन इंसानियत चला रहे हैं। भारत में भी ४०,००० रोहिंग्या हैं, तो क्या हम इंसानियत सिर्फ उन्हीं के लिए दिखाएंगे जो बांग्लादेश में हैं ? इस पर किरन रिजजू ने कहा कि देश के सभी हिस्सों में अलग-अलग जगहों पर प्रवासी है जिनको नागरिकता एक्ट के प्रावधानों के तहत देखा जाता है और नागरिकता देना या न देना इस एक्ट के प्रावधानो पर निर्भर है !
स्त्रोत : जागरण