Wednesday, 10 March 2021

मौलवियों, NGO, नेताओं की मिलीभगत से जम्मू में बसाए गए रोहिंग्या: डेमोग्राफी बदलने की साजिश, मदरसों-मस्जिदों में पनाह

 

vम्यांमार की न तो सीमा जम्मू कश्मीर से लगी हुई है और न ही दोनों संस्कृतियों के बीच कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध है, फिर भी प्रदेश में रोहिंग्या मुस्लिमों की संख्या इतनी कैसे हुई? हजारों की तादाद में रोहिंग्या मुस्लिमों का यहाँ पहुँच कर बस जाना किसी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। असल में इससे पहले भी देश में एक खास मजहब के कट्टर लोगों द्वारा ‘डेमोग्राफी बदलने’, अर्थात जनसंख्या में दबदबा बढ़ाने की साजिश की बात होती रही है।

‘दैनिक जागरण’ की एक विस्तृत खबर के अनुसार, इस साजिश में राजनीतिक लोगों के साथ-साथ कई NGO भी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे इतना सब कुछ अंजाम दिया गया। बांग्लादेश के रास्ते रोहिंग्या मुस्लिमों की खेप कोलकाता पहुँचती रही है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड की सीमाएँ सीधे म्यांमार से लगती हैं। पता चला है कि उन्हें मालदा लाकर वहाँ से जम्मू भेजा जा रहा था।

इन सब चीजों के तार दिल्ली से भी जुड़ते हैं, जहाँ संयुक्त राष्ट्र से सम्बद्ध संस्था द्वारा इन रोहिंग्या मुस्लिमों का पंजीकरण किया जाता है। ये संस्थाएँ ‘शरणार्थियों की मदद’ के नाम पर दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सक्रिय रहती हैं। इन तत्वों द्वारा रोहिंग्या मुस्लिमों को विश्वास दिलाया जाता है कि जम्मू कश्मीर एक मुस्लिम बहुल इलाका है, जहाँ उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी। वहाँ उन्हें इस्लाम प्रैक्टिस करने से कोई नहीं रोकेगा।

ये NGO और इस्लामी संस्थाएँ रोहिंग्या मुस्लिमों को जम्मू पहुँचाती थीं और उनकी यात्रा से लेकर रहने और खाने-पीने तक की व्यवस्था का पूरा जिम्मा उठाती थीं। जम्मू, सांबा और बाड़ी ब्राह्मणा में इनके लोग पहले से मौजूद रहते थे, जो मस्जिदों और मदरसों में इनके रहने का बंदोबस्त करते थे। फिर उन्हें झुग्गियों में बसा दिया जाता था। खास बात ये है कि उन्हें उन्हीं क्षेत्रों में बसाया जा रहा था, जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या कम है।साथ ही उन्हें जम्मू कश्मीर में चल रहे ‘जिहाद’ और म्यांमार में ‘बौद्धों के अत्याचार’ को जोड़ कर और कट्टर बनाया जाता है। उनसे कट्टर बातें कर के जिहादी तत्वों के लिए काम करने के लिए तैयार किया जाता था। पाकिस्तान के साथ जम्मू कश्मीर के सटे होने का उन्हें दोहरा फायदा मिलता था। उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और बांग्लादेश के मुस्लिम जम्मू में पहले से बसे हुए हैं, इसीलिए किसी को शक नहीं होता था।

जब भी इस पर कोई आवाज़ उठती थी तो इनकी मददगार संस्थाएँ उन्हें पीड़ित बताते हुए अपने खेल शुरू कर देती थीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, अवामी इत्तेहाद पार्टी और कॉन्ग्रेस ने रोहिंग्या मुस्लिमों को अपने वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। भले ही उन्हें वोट का अधिकार न हो, लेकिन उन्हें संरक्षण देकर मुस्लिम समाज को खुश किया जाता था और उनके खिलाफ कार्रवाई न कर के तुष्टिकरण की राजनीति की जाती थी।

जम्मू कश्मीर की अंतिम मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने कार्यकाल में कहा था कि रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर केंद्र सरकार ही निर्णय ले सकती है। जमात-ए-इस्लामी कश्मीर जैसे कई संगठन इनके लिए काम कर रहे हैं और उनके नाम पर जुलूस निकालते रहे हैं, क्षेत्र में तनाव का माहौल बनाते रहे हैं। ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के एक गुट के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने रोहिंग्या के लिए कश्मीर में सांत्वना दिवस का भी आयोजन किया था।

कुछ वर्षों पहले म्यांमारी आतंकी छोटा बर्मी को सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भी जम्मू कश्मीर के ‘जिहादियों’ और म्यांमार के ‘रोहिंग्याओं’ के बीच सेतु का काम कर रही है। कोलकाता के मौलवी भी उन्हें जम्मू पहुँचाने में मदद करते हैं। जम्मू कश्मीर में उन्हें रोजगार भी आसानी से मिल जाता है। कई रोहिंग्याओं का कहना है कि वो बिना किसी जाँच के ट्रेन से यहाँ आराम से पहुँच जाते हैं।

आँकड़े कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में कुल 13600 विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की है। जम्मू के बेली चराना और सांबा में भी इनकी बड़ी संख्या है। ड्रग्स रैकेट और आतंकी हमलों में इनका नाम सामने आता रहता है। जम्मू के बठिंडी में रोहिंग्याओं की संख्या बहुत ज्यादा है। अब वो स्थानीय आबादी में मिल गए हैं, जिससे उनकी पहचान खासी मुश्किल हो रही है।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर में 155 ऐसे रोहिंग्या मिले थे, जो म्यांमार में अपनी सज़ा से बच कर यहाँ रह रहे थे। उन सभी को ‘होल्डिंग सेंटर’ भेज दिया गया है। पुलिस ने फॉरेनर्स एक्ट के अनुच्छेद-3(2)e के तहत ये कार्रवाई की। साथ ही पासपोर्ट एक्ट के अनुच्छेद-3 के तहत प्रवासियों के पास पुष्ट ट्रैवल दस्तावेज होने चाहिए, जो उनके पास नहीं थे। ऐसे अन्य अवैध घुसपैठियों की पहचान करने की कोशिशें भी जारी हैं। 

स्त्रोत : Opindia


Friday, 6 November 2020

ଚମ୍ପୁଆ-ବଙ୍ଗଳାଦେଶୀ ଅନୁପ୍ରବେଶ ଉପରେ ଅଙ୍କୁଶ ଲୋଡା


 ଚମ୍ପୁଆ-ବଙ୍ଗଳାଦେଶୀ ଅନୁପ୍ରବେଶ ଉପରେ ଅଙ୍କୁଶ ଲୋଡା

ସମାଜ-

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Monday, 26 November 2018

लूट के बाद महिलाओं पर बलात्कार करता था बांग्लादेशी गैंग, डर से पुलिस को नहीं बुलाते थे पीडित

भारत-बांग्लादेश सीमा पर कोई भी व्यक्ति गैर-कानूनी तरीके से आर-पार नहीं जा सकता। परंतु देहली पुलिस ने जो बांग्लादेशी लुटेरे पकडे हैं, उनका नेटवर्क जानकर आप हैरान रह जाएंगे ! इनके पास भारत का कोई भी दस्तावेज नहीं है, परंतु ये वारदात को अंजाम देकर इस तरह से बांग्लादेश निकल जाते हैं जैसे इनके पास लीगल वीजा और पासपोर्ट सब कुछ हो !
यह बांग्लादेशी गैंग लूट के बाद महिलाओं की इज्जत से खेलता था। गैंग के सदस्य लूट के बाद रेप की वारदात को इसलिए अंजाम देते थे ताकि पीडित परिवार अपमान के डर से पुलिस को लूट या डकैती की सूचना न दे। सामने आया है कि ऐसे परिवार पुलिस को केवल हल्की-फुल्की चोरी की ही जानकारी देते थे !
देहली पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त राजीव रंजन के अनुसार, यह गैंग देहली-एनसीआर के अलावा गोवा, आगरा, कोटा, गुजरात व राजस्थान सहित करीब दर्जनभर राज्यों में सक्रिय रहा है। गैंग के सदस्य बिना किसी रोक-टोक के बांग्लादेश से भारतीय सीमा में प्रवेश कर जाते थे। इसके बाद वे अपना टारगेट तय कर वहां की तीन-चार बार रेकी करते थे।
वारदात को अंजाम देकर वे बडी आसानी से बांग्लादेश चले जाते थे। यह गैंग एक राज्य में महीने भर तक किराये के मकान में रहकर लगातार वारदात करता रहता है। जल्दी-जल्दी ठिकाना बदलने की वजह से ये न तो स्थानीय लोगों में पहचाने जाते हैं और न ही वहां की पुलिस इनका अता-पता लगाने में सक्षम होती है। देहली में इस गैंग के सदस्य सीमापुरी, लोनी और सोनिया विहार जैसे इलाकों में झुग्गी किराये पर लेकर रहते हैं !

शुक्रवार रात हुई मुठभेड में दो बदमाशों को लगी गोली, तीन काबू

क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि तैमूर नगर में बांग्लादेशी लुटेरों का एक गैंग वारदात करने के लिए आ सकता है। पुलिस ने लुटेरों के आने से पहले ही उन्हें पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया था। रात को पुलिस ने जब उन्हें ललकारा तो गैंग ने पुलिस पर गोली चला दी। मुठभेड़ में गैंग के दो सदस्यों को गोली लगी है।डीसीपी जी. रामगोपाल नाइक ने बताया कि पकड़े गए बांग्लादेशी लुटेरों की पहचान फारुख, जाकिर, इंदादुल, असलम और कबीर के तौर पर हुई है।

हुलिया हमारे जैसा है और आम लोगों की तरह हिंदी बोलते हैं

पुलिस का कहना है कि बांग्लादेशी गिरोह के सदस्यों का हुलिया भारतीय नागरिकों से मेल खाता है।स्थानीय लोगों को उन पर शक न हो, इसके लिए वे अच्छे से हिंदी बोलना सीख लेते हैं। इनका पहनावा भी भारतीयों जैसा होता है। इस वजह से स्थानीय लोग इन्हें रहने के लिए मकान आदि किराये पर दे देते हैं। वारदात के बाद ये चुपके से खिसक लेते हैं। यह गैंग बॉर्डर के उस हिस्से से बांग्लादेश चला जाता है, जहां सीमा पर घनी आबादी बसती है। वहां के लोगों से जान पहचान होने के कारण इन्हें आने-जाने में कोई खास दिक्कत नहीं आती !
स्त्रोत : अमर उजाला

Wednesday, 3 October 2018

୭ ରୋହିଙ୍ଗ୍ୟାଙ୍କୁ ବିଦା କଲା ଭାରତ


ନୂଆଦିଲ୍ଲୀ, ୩/୧୦ : ମିଆଁମାରରୁ ପ୍ରାୟ ୭ ଲକ୍ଷ ରୋହିଙ୍ଗ୍ୟା ବାଂଲାଦେଶରେ ପଶିଛନ୍ତି  । ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ କୁଆଡ଼େ ମାତ୍ର ୪୦ ହଜାର ଭାରତରେ ପଶିଛନ୍ତି ଓ ୧୫ ହଜାରଙ୍କୁ ଚିହ୍ନଟ କରାଯାଇଛି  । ତେବେ ପ୍ରକୃତ ସଂଖ୍ୟା କାହାରିକୁ ଜଣାନାହିଁ  । ହେଲେ ୨୦୧୨ରୁ ଏ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଗିରଫ ହୋଇଥିବା ୭ ଜଣ ରୋହିଙ୍ଗ୍ୟାଙ୍କୁ ଭାରତ ସରକାର ମିଆଁମାରକୁ ବିଦା କରିଛନ୍ତି  । ନୂଆଦିଲ୍ଲୀ, ହାଇଦ୍ରାବାଦ, ଉତ୍ତରପ୍ରଦେଶ, ଜମ୍ମୁ-କାଶ୍ମୀର, ଆସାମ, କେରଳ ବ୍ୟତୀତ ପଶ୍ଚିମବଙ୍ଗ ରୋହିଙ୍ଗ୍ୟାଙ୍କ ଗଡ଼ ପାଲଟିଛି  । ସେମାନଙ୍କୁ ଚିହ୍ନଟ କରି ବିଦା କରିବା ପାଇଁ ଭାରତ ସରକାର ଉଦ୍ୟମ କରୁଛନ୍ତି  ।
  

Sunday, 23 September 2018

बांग्लादेशी घुसपैठिये दीमक की तरह – अमित शाह


जयपुर : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर कहा है कि, भाजपा सरकार घुसपैठियों को चुन-चुनकर मतदाता सूची से निकालेगी। शनिवार को राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में एक जनसभा में शाह ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठिये दीमक की तरह हैं। इनको निकालने के लिए सरकार ने एनआरसी की प्रक्रिया शुरू की और प्राथमिक रूप से ४० लाख घुसपैठियों को चिह्नित कर लिया, परंतु कांग्रेस को इसमें भी दिक्कत है। उसे अपने वोट बैंक की चिंता है।
भाजपा चीफ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस देश का भला नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास न कोई नेता है और न ही कोई नीति। कांग्रेस द्वारा राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा पेश नहीं करने पर उन्होंने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि जिसका नेता और नीति तय न हो क्या उसे वोट देना चाहिए।

राहुल गांधी पर तीखा तंज

उन्होंने राहुल गांधी को राहुल बाबा संबोधित करते हुए कहा कि वह भाजपा के कामों का हिसाब चाहते हैं। जनता उनसे पूछना चाहती है कि उनके परिवार की चार पीढ़ियों ने क्या किया ? कांग्रेस के शासन में राजस्थान बीमारू राज्य था। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इसे प्रगति के रास्ते पर ले आई हैं। शाह ने कहा कि राजस्थान में भाजपा की सरकार अंगद के पांव की तरह है, जिसे कोई हटा नहीं सकता।
स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

Wednesday, 19 September 2018

झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों की मदद कर रहे सात कट्टरपंथी : खुफिया विभाग


खुफिया विभाग की मानें तो जमशेदपुर शहर और उसके आसपास के इलाकों में अवैध रूप से बसे बांग्लादेशी घुसपैठियों को सात कट्टरपंथी नेता संरक्षण दे रहे हैं !
जमशेदपुर : जमशेदपुर शहर और उसके आसपास के इलाकों में अवैध रूप से बसे ५ हजार बांग्लादेशी घुसपैठियों की सात कट्टरपंथी हर तरह से मदद करते हैं ! गत कुछ वर्षों में जिले में घुसपैठियों की कुल जनसंख्या बढकर ४३ हजार हो गई हैं। खुफिया विभाग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख करते हुए सभी कट्टरपंथियों पर कडी नजर रखने की सलाह दी है। मुख्यालय प्रेषित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को स्थानीय स्तर पर छुटभैए नेताओं का संरक्षण प्राप्त रहता है !
ये अपने प्रभाव का उपयोग कर सड़क किनारे स्थान इन्हें दिलाने से लेकर विभिन्न प्रकार के रोजगार दिलाने में मदद करते हैं। बडी संख्या में ये फेरी लगाकर सामान बेचने का धंधा करते हैं। मतदाता कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधारकार्ड और पासपोर्ट तक बनवा चुके इन घुसपैठियों ने कुछ इलाकों में जमीन खरीदकर मकान भी बना लिया है ! कट्टरपंथी अपनी विचारधारा फैलाने के लिए इनकी मदद करते हैं। कई घुसपैठियों को अब पहचान पाना मुश्किल हो गया है। वे स्थानीय नागरिक की तरह हर तरह की सुविधाएं प्राप्त करने लगे हैं !

ये हैं आठ कट्टरपंथी

खुफिया विभाग द्वारा मुख्यालय भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, सात कट्टरपंथी नेताओं में जवाहर नगर मानगो के मो. सलाउद्दीन अंसारी, गौसनगर कपाली के शहादत हुसैन, ओल्ड पुरुलिया रोड के आफताब आलम उर्फ सोनू, मानगो रोड नंबर १३ के अमजद, मानगो आजादनगर के नुरूलहक, जाकिरनगर आजादनगर के शाहनवाज और जाकिरनगर आजादनगर के ही तारिक खान शामिल हैं !

कहां कितनी जनसंख्या

साकची के आसपास – १०००, बारीनगर टेल्को – ७००, कीताडीह क्षेत्र – १५००, मकदमपुर क्षेत्र – ८००, जुगसलाई क्षेत्र – ५०००, धतकीडीह आसपास – ८००, शास्त्रीनगर क्षेत्र – ७००, आजादबस्ती कपाली – २५०००, डिमना मस्जिद क्षेत्र – २०००, हल्दीपोखर क्षेत्र – ५०००, गोविंदपुर क्षेत्र – ५००
जानें, क्या-क्या कर रहे धंधे पूर्वी सिंहभूम जिले में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए साकची बाजार तथा आसपास के क्षेत्रों में कपड़ा, मोजा, फल, चप्पल, जूता बेचने के साथ-साथ गांवों में फेरी लगाकर सामान बेच रहे हैं। गोविंदपुर क्षेत्र में बसे घुसपैठिए स्टील स्ट्रीप्स में काम के बहाने रह रहे हैं। खुफिया की रिपोर्ट कहती है कि इन्होंने अवैध तरीके से आधारकार्ड, वोटर कार्ड, राशनकार्ड तथा अन्य दस्तावेज बना लिए हैं !
स्त्रोत : जागरण