Tuesday, 28 August 2018

ଓଡିଶାରେ ଅନୁପ୍ରବେଶକାରୀ











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Thursday, 16 August 2018

अंडमान निकोबार में फर्जी दस्तावेजों के साथ दस बांग्लादेशी गिरफ्तार


पोर्ट ब्लेयर : उत्तरी अंडमान के दिगलीपुर क्षेत्र से दस बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है ! पुलिस ने मंगलवार को यहां बताया कि ये लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। पर्यटन के लिए प्रसिध्द दिगलीपुर प्रांतीय राजधानी पोर्ट ब्लेयर से ३२५ किलोमीटर दूर है !
दिगलीपुर पुलिस थाने के प्रभारी महेश यादव ने कहा, ‘पकडे गए सभी लोगों ने दावा किया था कि वह पश्चिम बंगाल के रहनेवाले हैं ! उन्होंने हमें राशन और वोटर कार्ड भी दिखाए। परंतु जांच करने पर सब फर्जी निकले !’
यादव ने बताया कि इन लोगों को अब पोर्ट ब्लेयर ले जाया जाएगा और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी !
स्त्रोत : जागरण

Wednesday, 15 August 2018

अंडमान निकोबार में फर्जी दस्तावेजों के साथ दस बांग्लादेशी गिरफ्तार


पोर्ट ब्लेयर : उत्तरी अंडमान के दिगलीपुर क्षेत्र से दस बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है ! पुलिस ने मंगलवार को यहां बताया कि ये लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। पर्यटन के लिए प्रसिध्द दिगलीपुर प्रांतीय राजधानी पोर्ट ब्लेयर से ३२५ किलोमीटर दूर है !
दिगलीपुर पुलिस थाने के प्रभारी महेश यादव ने कहा, ‘पकडे गए सभी लोगों ने दावा किया था कि वह पश्चिम बंगाल के रहनेवाले हैं ! उन्होंने हमें राशन और वोटर कार्ड भी दिखाए। परंतु जांच करने पर सब फर्जी निकले !’
यादव ने बताया कि इन लोगों को अब पोर्ट ब्लेयर ले जाया जाएगा और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी !
स्त्रोत : जागरण

Monday, 6 August 2018

असम व बंगाल की तरह बिहार के सीमांचल में भी हैं बांग्लादेशी घुसपैठिए : गिरिराज सिंह


केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को एनआरसी मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला करते हुए कहा कि बंगाल और असम के साथ-साथ बिहार के सीमांचल इलाकों में भी बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हैं ! कटिहार दौर पर पहुंचे सिंह ने उक्त बयान भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिरकत करने के दौरान दिया।
फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह भाजयुमो के प्रशिक्षण के दौरान युवा कार्यकर्ताओं को जोश भरने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए और एनआरसी जैसे कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने पाकिस्तान में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने पर भारत के साथ रिश्तों पर पूछे गए एक सवाल पर कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते मधुर होने की उम्मीद है, अगर नहीं हुए तो भाजपा ‘टिट फॉर टैट की नीति पर कायम है !
वहीं, बढ़ती आबादी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कड़े कानून लाकर दो बच्चे से अधिक पैदा करनेवाले लोगों को मताधिकार के साथ-साथ अन्य तमाम अधिकारों को छीनने की भी मांग की है !
स्त्रोत : न्यूज 18

Sunday, 5 August 2018

क्या कश्मीरी पंडितों की घर वापसी कराने की हिम्मत मोदी सरकार में है ? : शिवसेना


शिवसेना ने एनआरसी के मुद्दे पर केंद्र का समर्थन किया है। साथ ही उन्होने पूछा है कि क्या मोदी सरकार में विस्थापित कश्मीरी हिन्दुआें की ‘घर वापसी’ कराने की हिम्मत है ? राजग में सहयोगी शिवसेना ने कहा कि भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बननेवालों को देश से बाहर फेंक देना चाहिए। कश्मीर में घुसपैठियों को हर हाल में मार गिराना चाहिए।
शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे लेख में कहा गया है कि, जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देनेवाले अनुच्छेद-३७० को हटाना भी एनआरसी लागू करने की तरह राष्ट्रवादी काम है।
भाजपा असम से ४० लाख से ज्यादा घुसपैठियों को खदेडने के लिए बहुत मेहनत कर रही है। ऐसे अवैध प्रवासियों को देश से निकालाना राष्ट्रभक्ति का काम है। असम से अवैध बांग्लादेशी, श्रीलंकाई, पाकिस्तानी और रोहिंग्या मुसलमानों को हर हाल में भगाया जाना चाहिए।
शिवसेना ने लिखा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा केवल असम तक सीमित नहीं है। कश्मीर में हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। घाटी में पाकिस्तान से ज्यादा खतरा है। पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में सेना का राज कायम होने वाला है।
अवैध अप्रवासियों ने असम की भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थिति को बदल दिया है। यही स्थिति कश्मीर में भी है।
शिवसेना ने सवाल उठाया है कि क्या सरकार इसी तरह १.५ लाख विस्थापित कश्मीरी हिन्दुआें की घर वापसी सुनिश्चित कराने की हिम्मत भी दिखाएगी। कश्मीर का मसला केवल हिन्दुत्व से ही नहीं जुडा है, बल्कि यह देश की सुरक्षा और संस्कृति का मामला है। आतंकवाद का उपयोग कर हिन्दुओं को कश्मीर से भगा दिया गया।
लेख में कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह में अनुच्छेद-३७० हटाने की हिम्मत नहीं थी। नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने से पहले अनुच्छेद-३७० हटाने और घाटी में तिरंगा फहराने का वादा किया था। मोदी सरकार को कश्मीर में राष्ट्रधव्ज जलाने वाले और पाकिस्तानी झंडे लहराने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
स्त्रोत : अमर उजाला

देखिए कैसे भारत में घुसते हैं बांग्‍लादेशी


असम में एनआरसी ड्राफ्ट जारी होने के बाद सडक से लेकर संसद तक हलचल मची हुई है ! इसमें ४० लाख लोगों का नाम शामिल नहीं हैं। उनकी नागरिकता पर सवाल खडे हो गए हैं। हालांकि, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है, यह फाइनल लिस्ट नहीं है। अभी इसमें और सुधार किया जाएगा। वहीं, इस मसले पर ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी सरकार बांटों और राज करो की नीति अपना रही है ! इससे देश में गृह युद्ध छिड जाएगा। परंतु इन सब के बीच बडी बात यह है कि आखिर एनआरसी ड्राफ्ट की आवश्यकता क्यों पडी ? दरअसल असम राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या काफी समय से है। यह यहां की बडी समस्या बन गई है। आज हम आपको बता रहे हैं कि असम में किस तरह से घुसपैठ हो रहा है। घुसपैठ से जुडा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें यह साफ दिख रहा है कि बांग्लादेशी भारत में किस तरह से घुस रहे हैं !
इंडिया टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, १६ मिनट के इस वीडियो में यह दिखाया गया है कि असम से सटे भारत-बांग्लादेश बार्डर पर वह कौन-कौन से इलाके हैं, जहां से बांग्लादेशी भारत में घुसपैठ कर रहे हैं। बार्डर की स्थिति क्या है ? यह वीडियो उस एक सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट का हिस्सा है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने असम में घुसपैठ का स्थिति का पता लगाने के लिए गठन किया था। वैसे यह रिपोर्ट २०१५ में ही उच्चतम न्यायालय को सौंपी गई थी, परंतु इसमें जो बातें बताई गई है, वो बेहद चौंकानेवाली है !
भारत और असम के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा ४००० किलोमीटर की है, परंतु असम से लगनेवाली यह सीमा २७२ किलोमीटर है। इसमें ९५ किलोमीटर नदी सीमा है। इस सुरक्षा की जिम्मेदारी बीएसएफ की है। इस रिपोर्ट में असम के टाकमारी गांव का उल्लेख है, जो बार्डर पर स्थित है। एक बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि, “इसकी दूरी बार्डर से महज २० से ३० मीटर है। यहां एक आेर भारतीयों के घर है तो दूसरी ओर बांग्लादेशियों के घर। यहां किसी तरह की घेराबंदी नहीं की गई है। इस गांव में काफी संख्या में लोग रहते हैं। यहां से घुसपैठ भी काफी होता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि यहां रहनेवाले लोगों को दूसरे जगह पर शिफ्ट कर देना चाहिए। यह घुसपैठ के लिहाज से काफी संवेदनशील है। यदि कभी संदिग्ध लोगों का पीछा करते किसी घर में घुस जाते हैं तो गांववाले सेना के उपर ही गंभीर आरोप लगाने लगते हैं !”
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि असम की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। यहां अचानक कई परिवारों का नाम वोटर लिस्ट में जुड गया। रिपोर्ट में मवेशी हार्ट को सीमा से कम से कम २० किलोमीटर दूर लगाने और बार्डर पर स्थित गांव को फेंसिग से रिलोकेट करने की बात कही। रिपोर्ट में कहा गया था कि एक बांग्लादेशी पासपोर्ट धारक न केवल आसानी से असम में जमीन खरीद सकता है, बल्कि यहां से चुनाव भी लड सकता है ! कई जगह खुली बार्डर है तो कई जगह मवेशियों के सहारे घुसपैठ होता है। असम से बांग्लादेश तक ब्रह्मपुत्र नदी बहती है। कई जगह इस नदी का एक सीमा भारत में है तो दूसरा सीमा बांग्लादेश में। इस नदी के सहारे काफी लोग भारत में घुसपैठ करते हैं, मवेशियों की तस्करी होती है !
स्त्रोत : जनसत्ता